भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस हफ्ते ई-मैंडेट (e-mandate) नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। अब म्यूचुअल फंड SIP और इंश्योरेंस प्रीमियम भरने वाले निवेशकों को बार-बार OTP के झंझट से मुक्ति मिलेगी। कार्ड बदलने पर पेमेंट फेल होने की समस्या भी अब खत्म हो जाएगी। इन बदलावों से आम यूजर्स के लिए डिजिटल तरीके से अपने पैसे मैनेज करना काफी आसान हो गया है।

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अब बिना OTP के ऑटोमैटिक पेमेंट की लिमिट बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी गई है। यह नया नियम इंश्योरेंस प्रीमियम, क्रेडिट कार्ड बिल और म्यूचुअल फंड निवेश पर लागू होगा। पहले 15,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए एडिशनल वेरिफिकेशन की जरूरत पड़ती थी। अब बड़े अमाउंट वाले मंथली पेमेंट्स बिना किसी मैन्युअल दखल के अपने आप पूरे हो जाएंगे। यह बदलाव खास तौर पर बड़े निवेश और पेमेंट्स को ध्यान में रखकर किया गया है।

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SIP और इंश्योरेंस के लिए नए ई-मैंडेट नियम

कार्ड एक्सपायर होने या खो जाने पर अक्सर यूजर्स को चिंता रहती थी कि उनके पेमेंट्स रुक जाएंगे। पहले नया कार्ड मिलने पर हर पेमेंट के लिए दोबारा रजिस्ट्रेशन करना पड़ता था। लेकिन नए नियमों के तहत, बैंक पुराने मैंडेट को नए कार्ड पर खुद ही मैप कर सकेंगे। इससे आपकी SIP और पॉलिसी प्रीमियम बिना किसी रुकावट के पूरे साल चलते रहेंगे।

इन मैंडेट्स को मैनेज करना अब बैंक मोबाइल ऐप के जरिए और भी सरल हो गया है। हालांकि, किसी भी तरह के डबल चार्ज से बचने के लिए समय-समय पर एक्टिव मैंडेट्स चेक करते रहना बेहतर है। UPI AutoPay पर भी यही नियम लागू होंगे, जिससे यूजर्स को काफी सुविधा मिलेगी। इससे आपके डिजिटल वॉलेट और बैंक अकाउंट के बीच तालमेल बेहतर बना रहेगा।

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ई-मैंडेट नियम और कार्ड रिप्लेसमेंट का मैनेजमेंट

बैंक फिलहाल RBI के इन नए नियमों के हिसाब से अपने सिस्टम को अपडेट कर रहे हैं। कुछ बैंकों को सभी फीचर्स पूरी तरह लागू करने में कुछ हफ्तों का समय लग सकता है। इसलिए, बैंक के ऑफिशियल ऐप पर जाकर अपनी मैंडेट लिस्ट चेक करना एक समझदारी भरा कदम होगा। इससे आपको पता चल जाएगा कि किन पेमेंट्स के लिए अभी भी मैन्युअल अप्रूवल की जरूरत पड़ सकती है।

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आज बस कुछ मिनट निकालकर ये सेटिंग्स चेक करने से आप भविष्य में पेमेंट फेल होने की परेशानी से बच सकते हैं। ये बदलाव डिजिटल पेमेंट को और भी आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। मॉडर्न बैंकिंग अब सुरक्षा के साथ-साथ यूजर्स की सहूलियत को भी प्राथमिकता दे रही है। अब भारी-भरकम SIP और इंश्योरेंस प्लान मैनेज करना हर किसी के लिए आसान हो गया है।