देश में साफ ऊर्जा और पर्यावरण से जुड़ी परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन डिपॉजिट की व्यवस्था लागू की गई है। लेकिन अब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक मानते हैं कि मौजूदा नियमों में कुछ व्यावहारिक बदलाव किए बिना इस योजना को गति देना मुश्किल है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बैंक जल्द ही इस संबंध में Reserve Bank of India से चर्चा कर सकते हैं।
ग्रीन डिपॉजिट क्यों अहम है?
ग्रीन डिपॉजिट का मकसद यह है कि बैंकों में जमा होने वाला पैसा सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, प्रदूषण नियंत्रण और अन्य पर्यावरण-अनुकूल परियोजनाओं में लगाया जाए। इससे देश को साफ ऊर्जा की ओर बढ़ने में मदद मिलती है।
भारत ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का टारगेट तय किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत होगी। बैंक इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
दिसंबर 2025 के दिशा-निर्देश
दिसंबर 2025 में RBI ने जलवायु वित्त और जोखिम प्रबंधन से जुड़े नियम जारी किए थे। इन नियमों के तहत बैंकों के बोर्ड को ग्रीन फंडिंग के लिए स्पष्ट नीति बनानी होती है।
बैंकों को यह तय करना होता है कि पैसा सही परियोजनाओं में लगे, जमाकर्ताओं का हित सुरक्षित रहे और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो। नियमित रिपोर्टिंग भी अनिवार्य है।
बैंकों की क्या परेशानी है?
सरकारी बैंकों का कहना है कि ग्रीन डिपॉजिट में अभी तक ग्राहकों की भागीदारी सीमित है। आम जमा की तुलना में इसमें कोई खास अतिरिक्त फायदा नहीं है।
बैंक भी यह महसूस कर रहे हैं कि उन्हें इस पर कोई वित्तीय राहत नहीं मिलती। ऐसे में इस योजना को लोकप्रिय बनाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
CRR में छूट की मांग
बैंकों की मुख्य मांग यह है कि ग्रीन डिपॉजिट पर कैश रिजर्व रेशियो (CRR) में कुछ राहत दी जाए। वर्तमान में बैंकों को अपनी कुल जमा का 3 प्रतिशत हिस्सा RBI के पास रखना होता है।
अगर ग्रीन डिपॉजिट पर यह प्रतिशत कम किया जाए, तो बैंकों के पास ज्यादा धन रहेगा। इससे वे पर्यावरण से जुड़ी परियोजनाओं को अधिक कर्ज दे सकेंगे।
टैक्सोनॉमी पर स्पष्टता जरूरी
सरकार ने मई 2025 में क्लाइमेट फाइनेंस टैक्सोनॉमी का मसौदा जारी किया था। इसका उद्देश्य यह तय करना है कि कौन-सी आर्थिक गतिविधियां वास्तव में पर्यावरण के अनुकूल हैं। बैंकों का कहना है कि इस पर और साफ दिशा-निर्देश मिलेंगे तो निवेश प्रक्रिया आसान और भरोसेमंद बनेगी।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ग्रीन डिपॉजिट को आकर्षक बनाया जाए और नियमों में संतुलित बदलाव किए जाएं, तो आम लोग भी इसमें निवेश करने के लिए प्रेरित होंगे।
अब देखना होगा कि RBI और सरकार बैंकों की इन मांगों पर क्या निर्णय लेते हैं। अगर राहत मिलती है, तो हरित परियोजनाओं को नई रफ्तार मिल सकती है और देश अपने जलवायु लक्ष्य के करीब पहुंच सकता है।
More Articles
- GIFT City क्या है? NRIs के लिए Dollar Investment का आसान तरीका | Benefits, Process & Risks
- अदाणी एंटरप्राइजेज ने एयरलाइन लॉन्च की अटकलों को किया खारिज, कहा- रिपोर्ट्स निराधार
- भारी बारिश का अलर्ट: बाढ़ में डूबी कार को स्टार्ट न करें, क्लेम पाने का सही तरीका जानें
- Gandhar Oil Refinery के शेयर में लगा अपर सर्किट! मुनाफा और रेवेन्यू ने किया कमाल, अब क्या होगा?
- GST QRMP स्कीम: PMT-06 पेमेंट में 35% चालान चुनें या सेल्फ-असेसमेंट? ब्याज से बचने का पूरा गणित
- ITR फाइलिंग की डेडलाइन: 31 जुलाई से पहले निपटा लें ये जरूरी काम, वरना होगा नुकसान