Premium Housing: भारतीय रियल एस्टेट बाजार में 2026 की पहली छमाही (H1 2026) के दौरान एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अब खरीदार केवल एक घर खरीदने पर ध्यान नहीं दे रहे, बल्कि बेहतर स्पेस, आधुनिक सुविधाओं और प्रीमियम लाइफस्टाइल वाले घरों को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही वजह है कि Affordable Housing की मांग में तेज गिरावट दर्ज हुई है, जबकि Premium और Luxury Housing सेगमेंट ने पूरे बाजार की ग्रोथ को मजबूती दी है।

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JLL की H1 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के सात प्रमुख शहरों में आवासीय बिक्री सालाना आधार पर 3% बढ़कर 1,38,382 यूनिट रही। वहीं, नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग 9% बढ़कर 1,68,507 यूनिट तक पहुंच गई। हालांकि, इन आंकड़ों के पीछे सबसे बड़ी कहानी खरीदारों की बदलती पसंद की है।

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Affordable Housing की बिक्री लुढ़की

रिपोर्ट के अनुसार, 50 लाख रुपये से कम कीमत वाले घरों की बिक्री में सालाना आधार पर 32% की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, 50 लाख से 1 करोड़ रुपये के बीच आने वाले घरों की बिक्री भी 20% कम रही।

इसका असर कुल बाजार हिस्सेदारी पर भी साफ दिखाई दिया। H1 2025 में 1 करोड़ रुपये से कम कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी कुल बिक्री का 39% थी, जो H1 2026 में घटकर केवल 28% रह गई। यानी अब Affordable Housing का दबदबा लगातार कमजोर होता जा रहा है।

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Premium Housing बना बाजार की ताकत

दूसरी ओर, 1.5 करोड़ से 3 करोड़ रुपये की कीमत वाले घरों की बिक्री में 58% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस कैटेगरी में कुल 51,231 यूनिट्स की बिक्री हुई।

इसके साथ ही 1 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी कुल बिक्री में बढ़कर 71% पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 62% था।

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ये आंकड़े बताते हैं कि भारतीय खरीदार अब सिर्फ कम कीमत वाला घर नहीं, बल्कि बेहतर लोकेशन, आधुनिक सुविधाएं, बड़े स्पेस और प्रीमियम लाइफस्टाइल वाले घरों की तलाश कर रहे हैं।

क्यों बढ़ रही है Premium Homes की मांग?

विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई बड़े कारण हैं:

  • सबसे पहला कारण लोगों की बढ़ती आय और बेहतर जीवनशैली की चाह है। कोविड-19 के बाद घर केवल रहने की जगह नहीं रहा, बल्कि यह एक लाइफस्टाइल स्टेटमेंट बन चुका है।
  • दूसरा कारण Work From Home और Hybrid Working Culture है। अब लोग ऐसे घर चाहते हैं जहां होम ऑफिस, अतिरिक्त कमरा और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों। यही सुविधाएं ज्यादातर प्रीमियम प्रोजेक्ट्स में मिलती हैं।
  • तीसरा कारण बेहतर होम लोन विकल्प हैं। बैंक और Housing Finance Companies प्रीमियम खरीदारों के लिए आकर्षक फाइनेंसिंग योजनाएं दे रहे हैं, जिससे ऊंची कीमत वाले घर खरीदना पहले की तुलना में आसान हो गया है।

इसके अलावा निवेशकों का भी Premium Housing की ओर झुकाव बढ़ा है, क्योंकि इस सेगमेंट में Capital Appreciation यानी संपत्ति की कीमत बढ़ने की संभावना अधिक मानी जाती है।

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डेवलपर्स भी अब Affordable Projects की तुलना में Premium और Luxury Projects पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं क्योंकि इस सेगमेंट में बेहतर मार्जिन मिलता है।

Knight Frank की H1 2026 रिपोर्ट भी इसी ट्रेंड की पुष्टि करती है। रिपोर्ट के अनुसार, 1 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी कुल बिक्री में बढ़कर 54% तक पहुंच चुकी है।

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किन शहरों में सबसे ज्यादा रही बिक्री?

H1 2026 के दौरान बेंगलुरु सबसे मजबूत बाजार बनकर उभरा। यहां आवासीय बिक्री 16% बढ़कर 35,017 यूनिट हो गई।

चेन्नई ने प्रतिशत के हिसाब से सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की, जहां बिक्री 27% बढ़कर 8,587 यूनिट रही।

दिल्ली-एनसीआर में भी 7% की बढ़ोतरी के साथ 20,761 यूनिट्स की बिक्री हुई।

हालांकि सभी शहरों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा। पुणे में बिक्री 14% घटी, हैदराबाद में 3% की गिरावट दर्ज हुई, जबकि मुंबई और कोलकाता में भी 1-1% की मामूली कमी देखने को मिली।

कुल मिलाकर बेंगलुरु, मुंबई, पुणे और दिल्ली-एनसीआर ने देश की कुल आवासीय बिक्री में लगभग 76% योगदान दिया।

नई परियोजनाओं की लॉन्चिंग के मामले में भी बेंगलुरु सबसे आगे रहा, जहां 48,748 नई यूनिट्स लॉन्च की गईं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 41% अधिक हैं। मुंबई में लॉन्चिंग 18% और दिल्ली-एनसीआर में 14% बढ़ी।

घरों की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी

सिर्फ बिक्री ही नहीं, बल्कि घरों की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली। सातों प्रमुख शहरों में आवासीय कीमतें सालाना आधार पर 6% से 15% तक बढ़ीं।

सबसे ज्यादा बढ़ोतरी बेंगलुरु में दर्ज की गई, जहां कीमतें 15% तक बढ़ीं। इसके बाद चेन्नई और कोलकाता में 13% की वृद्धि हुई।

विशेषज्ञों के मुताबिक निर्माण सामग्री की बढ़ती लागत और प्रीमियम घरों की मजबूत मांग इसकी प्रमुख वजह है।

आगे कैसा रहेगा रियल एस्टेट बाजार?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, तेज शहरीकरण, बढ़ती आय और बेहतर कनेक्टिविटी के चलते भारतीय हाउसिंग सेक्टर की मांग मजबूत बनी रह सकती है।

हालांकि अप्रैल-जून तिमाही में बिक्री की रफ्तार कुछ धीमी रही, लेकिन JLL का कहना है कि इसका कारण मांग में कमजोरी नहीं, बल्कि मौसमी प्रभाव और खरीदारों द्वारा निर्णय लेने में अधिक समय लगना था।

इस बीच CBRE की H1 2026 रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में 8.5 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निवेश आया है, जो निवेशकों के मजबूत भरोसे को दर्शाता है।

हालांकि बाजार के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। मध्य-पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल और निर्माण सामग्री की लागत 5% से 10% तक बढ़ी है। इसके अलावा देशभर में अनसोल्ड इन्वेंट्री बढ़कर 5,25,695 यूनिट्स तक पहुंच गई है, जिससे डेवलपर्स को नई लॉन्चिंग और प्राइसिंग रणनीति पर सावधानी बरतनी पड़ सकती है।

कुल मिलाकर H1 2026 के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि भारतीय रियल एस्टेट बाजार अब Affordable Housing से Premium Housing की ओर तेजी से शिफ्ट हो रहा है। यदि यह ट्रेंड जारी रहता है, तो आने वाले वर्षों में प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट भारतीय हाउसिंग मार्केट की ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन बन सकता है।