Government Saving Scheme: शेयर बाजार की तेजी में निवेशकों को धमाकेदार रिटर्न मिल रहा. यही वजह है कि कोरोनाकाल के बाद निवेशकों की संख्या में तेजी से इजाफा देखने को मिला है. डीमैट खाते की कुल संख्या 17 करोड़ के पार निकल गया है, जोकि प्री-कोविड समय में 3-4 करोड़ थी.

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मौजूदा समय में भी निवेश के लिए निवेशक इक्विटी मार्केट को ही तवज्जो दे रहे. लेकिन इनवेस्टमेंट टूल्स के लिहाज से यह निवेश का एक हाई रिस्क टूल है. क्योंकि मार्केट के मूवमेंट पर इसका रिटर्न तय होता है. ऐसे में निवेशक अपनी आमदनी का एक हिस्सा कम रिस्क वाली इनवेस्टमेंट टूल्स में निवेश करते हैं.

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ब्याज दरों में हो गया बदलाव?

गारंटीड रिटर्न और कम रिस्क के लिहाज से सरकारी सेविंग स्कीम बेस्ट होता है. सरकारी सेविंग स्कीम में पब्लिक प्रोविडेंट फंड, रिकरिंग डिपॉजिट, पोस्ट ऑपिस की मंथली इनकम स्कीम, सुकन्या समृद्धी योजना, सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम, किसान विकास पत्र समेत नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट शामिल हैं. इन स्कीम में हर तिमाही ब्याज दरों को तय किया जाता है. Q3 के लिए सरकार ब्याज दरें तय किया जाता है. 1 अक्टूबर के लिए ब्याज दरें में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

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सरकारी स्कीम और उन पर मिलने वाला ब्याज

स्कीम ब्याज दर
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) 7.1%
5-ईयर रिकरिंग डिपॉजिट (RD) 6.7%
पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (PO-MIS) 7.4%
सुकन्या समृद्धि योजना 8.2%
सीनियर सिटीजन सविंग स्कीम (SCSS) 8.2%
किसान विकास पत्र (KVP) 7.5%
नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) 7.7%

सरकारी बचत योजनाओं के कई फायदे हैं...

सरकारी सेविंग स्कीम के कई फायदे हैं. इसमें सबसे पहला ये की इन स्कीम्स में निवेश पर रिटर्न की गारंटी होती है. अन्य इनवेस्टमेंट टूल्स के मुकाबले यहां रिटर्न पक्का मिलता है. स्कीम्स में निवेश करने से टैक्स छूट मिलती है.

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इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत निवेशक को टैक्स छूट मिलती है. इसके तहत एक फाइनेंशियल ईयर में 1.5 लाख रुपए तक की टैक्स छूट मिलती है. सरकारी स्कीम में निवेश पर रिस्क भी कम होता है. इन योजनाओं में निवेश, ब्याज, और मैच्योरिटी पर मिलने वाला अमाउंट टैक्स फ्री होता है.