नयी दिल्ली। सरकार ने पब्लिक प्रोविडेंट फंड या पीपीएफ से जुड़े कुछ नियमों में बदलाव का ऐलान किया है। पीपीएफ योजना 2019 में कई प्रावधान छोटी बचत योजना पीपीएफ का भी हिस्सा हैं। पीपीएफ योजना के स्ट्रक्चर को बदलने के लिए जो परिवर्तन किए गए हैं उन पर आपको ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि इनमें से कई बदलाव ऐसे हैं, जो आपके निवेश को प्रभावित कर सकते हैं। उससे पहले हम आपको बतातें हैं कि पीपीएफ 15 साल की मैच्योरिटी अवधि का एक लंबी अवधि का निवेश विकल्प है। मुख्य रूप से इसे किसी की बचत को निवेश विकल्प में बदलने लिए पेश किया गया था। उदारहण के लिए पीपीएफ से आपको रिटायरमेंट के बाद अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। मौजूदा नियमों के अनुसार आप पीपीएफ खाता को उस वित्तीय वर्ष के अंत से 5 वर्ष की समाप्ति के बाद समय से पहले खाता बंद कर सकते है जिसमें पीपीएफ खाता खोला गया था।
जिस साल आपने पीपीएफ खाता खुलवाया है, उसके तीसरे वित्तीय वर्ष से आप पीपीएफ पर लोन भी ले सकते हैं। अब इस लोन पर ब्याज दर कम की गयी है। पीपीएफ योजना 1968 के तहत पहले पीपीएफ पर ब्याज दर 2% थी। मगर यह दर पीपीएफ ब्याज दर के ऊपर होती है। उदाहरण के लिए अगर पीपीएफ ब्याज दर 8 फीसदी होती, तो आपको लोन पर 10 फीसदी ब्याज दर का भुगतान करना होता। मगर नये बदलाव से अब पीपीएफ दर 8 फीसदी होगी, तो आपको 9 फीसदी ब्याज दर का चुकानी होगी।
पीपीएफ खाता खुलवाने के 5 साल बाद पीपीएफ अकाउंट बंद करवाने की अनुमति है। इसके लिए खाताधारक, पति या पत्नी या बच्चों और माता-पिता को किसी गंभीर बीमारी या जीवन का खतरा होने पर समय से पहले खाता बंद करने की अनुमति है। इस नियम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मगर एक नया नियम सरकार ने जोड़ा है, जिसके तहत अगर आप अपनी रेसिडेंसी बदलते हैं तो भी आप खाता समय से पहले बंद करवा सकते हैं। मगर आपको पासपोर्ट, वीजा और इनकम टैक्स रिटर्न की कॉपी देनी होगी।
नये नियमों में पीपीएफ खाताधारक जितनी मर्जी बार 50 रुपये के गुणज में एक वित्त वर्ष में 1.5 लाख रुपये तक जमा कर सकेगा। पहले एक साल में केवल 12 बार ही पैसे जमा करने की छूट थी। इसके अलावा आप ऊपरी सीमा के दायरे में कितने भी पैसों का चेक जमा कर सकेंगे, जबकि पहले अधिकतम 25,000 रुपये का चेक जमा हो सकता था।
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