Personal Loan Amount: अगर आप पर्सनल लोन लेना चाह रहे हैं तो सबसे पहले आपको यह पता होना चाहिए कि आपको पर्सनल लोन किस आधार पर मिलता है और उसकी रकम किन फैक्टर पर डिसाइड की जाती है। ताकि जब भी आप कोई प्लान बनाएं अपने पर्सनल लोन की रकम के हिसाब से बना सकें। पर्सनल लोन का अमाउंट डिसाइड करने में सबसे अहम भूमिका क्रेडिट स्कोर की होती है।

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इसके अलावा भी कई ऐसे फैक्टर्स हैं जिन पर आपके पर्सनल लोन का अमाउंट डिपेंड करता है। आज के आर्टिकल में हम आपको इन्हीं फैक्टर के बारे में बताने जा रहे हैं साथ ही हम यह भी बताएंगे कि यह कैसे आपके पर्सनल लोन के अमाउंट पर असर डाल सकते हैं।

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अगर आप पर्सनल लोन लेना चाहते हैं तो उसमें आपकी महीने की इनकम यानी आए भी एक बड़ा कारण होती है। आइए जानते हैं कि आपकी इनकम से कैसे आपका पर्सनल लोन का अमाउंट डिसाइड किया जाता है।

एक्सपर्ट बताते हैं कि आपकी इनकम आपके पर्सनल लोन में बहुत बड़ी भूमिका अदा करती है। बैंक इनकम को भी एक ऐसे मापदंड की तरह इस्तेमाल करते हैं जिसके आधार पर आपको पर्सनल लोन दिया जा सकता है। बैंकों की पॉलिसी के मुताबिक आम तौर पर आपकी महीने की सैलरी के हिसाब से आपको 10 से लेकर 24 महीने तक का ही पर्सनल लोन अमाउंट मिल सकता है।

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इस हिसाब से देखा जाए तो अगर इस समय आपकी सैलरी 50,000 रुपए प्रति महीने की है, तो आपको 24 महीने के अमाउंट के बराबर कुल मिलाकर 12 लाख रुपए तक का लोन ही मिल सकता है। हांलाकि यह रकम कम से कम 5 लाख रुपए तक भी हो सकती है।

पुराने लोन

अगर आपके पास पहले से कोई होम लोन लेकर लोन या फिर पर्सनल लोन चल रहा है, तो बैंक के द्वारा आपको दिए जाने वाले पर्सनल लोन की राशि काफी काम की जा सकती है या फिर उसे खारिज में किया जा सकता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि आम तौर पर बैंक या नॉन बैंकिंग फाइनेंसिंग कंपनी 36 प्रतिशत से कम वाले डेट टू इनकम रेश्यो वालों को ही पर्सनल लोन देने के लिए प्रायोरिटी पर रखती है। क्योंकि इस तरीके से उन्हें लोन वापस वसूलने में दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता है।

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नौकरी का एक्सपीरियंस

अब इसे चाहे नौकरी का समय बोलें या फिर आपका एक्सपीरियंस, यह दोनों जितने ज्यादा होते हैं, आपको उतना ज्यादा पर्सनल लोन मिल सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आप जितनी ज्यादा समय से नौकरी कर रहे हैं आपकी स्टेबिलिटी उतनी बेहतर होती है और आपकी इनकम भी नए लोगों के मुकाबले ज्यादा रहती है।

क्रेडिट स्कोर का भी पड़ता है असर

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ऊपर दिए गए सभी फैक्टर्स के अलावा आपको कितना लोन मिलेगा और उस पर कितना ब्याज लगेगा इसमें सबसे बड़ा योगदान क्रेडिट स्कोर का होता है। इस लिए आप अपने सिबिंस स्कोर को जितना बेहतर रखेंगे आपको लोन लेते समय उतना ज्यादा फायदा होगा। अगर आपका सिबिल स्कोर 750 के ऊपर होता है तो आपको काफी ज्यादा आसानी से ज्यादा अमाउंट का लोन मिल सकता है और उस पर ब्याज भी कम क्रेडिट स्कोर के मुकाबले कम हो सकता है। इस लिए आपको हमेशा अपना क्रेडिट स्कोर बेहतर रखना चाहिए।

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