Pension Rules: केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक अहम ऐलान किया है। पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoP&PW) ने साफ किया है किसी भी सरकारी कर्मचारी या पेंशनभोगी की बेटी का नाम पारिवारिक रिकॉर्ड से नहीं हटाया जा सकता। यह नया निर्देश तय करेगा कि बेटियों के पेंशन से जुड़े अधिकार भविष्य में भी सुरक्षित रहें।

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क्यों आया यह नया स्पष्टीकरण

कई सरकारी विभागों ने DoP&PW से पूछा था कि रिटायरमेंट के बाद क्या कर्मचारी की बेटी का नाम पारिवारिक डिटेल से हटाया जा सकता है। इस पर विभाग ने हाल ही में जारी सर्कुलर में कहा कि बेटी का नाम किसी भी स्थिति में लिस्ट से नहीं हटाया जाएगा। चाहे वह फिलहाल पेंशन की ऐलीजिबल हो या नहीं उसका नाम परिवार के रिकॉर्ड में बना रहेगा।

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क्या कहते हैं पेंशन नियम

फाइनेंशियल एक्स्प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम 2021 के मुताबिक, हर सरकारी कर्मचारी को नौकरी में शामिल होते समय अपने परिवार के सभी सदस्यों पति या पत्नी, बच्चे, माता-पिता और विकलांग भाई-बहनों की पूरी जानकारी देनी होती है।

रिटायरमेंट के समय इन डिटेल्स को दोबारा अपडेट करना अनिवार्य है ताकि भविष्य में किसी ऐलीजिबल सदस्य को पेंशन पाने में कोई दिक्कत न हो। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि परिवार से संबंधित जानकारी पूरी तरह सटीक रहे और ऐलीजिबल सदस्यों को समय पर उनका हक मिल सके।

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बेटियों का नाम रहेगा स्थायी रिकॉर्ड में

DoP&PW ने अपने पुराने निर्देश (7 अक्टूबर 2022) का भी उल्लेख किया है, जिसमें कहा गया था कि परिवार के सभी सदस्यों को भले ही वे तत्काल पेंशन के पात्र न हों फॉर्म 4 में शामिल किया जाना चाहिए। इसका अर्थ यह है कि बेटी का नाम एक बार परिवार की लिस्ट में दर्ज होने के बाद हटाया नहीं जाएगा। पेंशन के लिए उसकी तत्काल ऐलिजीबिलिटी चाहे जो भी हो उसका नाम स्थायी रूप से रिकॉर्ड में रहेगा।

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पेंशन का हक कब मिलेगा बेटी को

नए स्पष्टीकरण के मुताबिक, बेटी की पेंशन ऐलिजीबिलिटी का निर्धारण तभी होगा जब पेंशनभोगी या मौजूदा पारिवारिक पेंशन पाने वाला व्यक्ति निधन हो जाए। उसके बाद पेंशन नियमों के तहत अगर बेटी ऐलीजिबल पाई जाती है, तो उसे पारिवारिक पेंशन का फायदा मिल सकता है।

सरकार का उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा

यह फैसला महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक मजबूत कदम माना जा रहा है। अब किसी भी स्थिति में बेटी का नाम रिकॉर्ड से नहीं हटेगा, जिससे भविष्य में उसे पेंशन का दावा करने में कोई समस्या नहीं होगी।

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केंद्र सरकार का यह कदम पारिवारिक पेंशन व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने के साथ-साथ बेटियों के अधिकारों की सुरक्षा को भी मजबूत करता है। यह निर्णय उन परिवारों के लिए राहत भरा है, जिनकी बेटियां अब अपने भविष्य को लेकर अधिक सुरक्षित महसूस कर सकेंगी।