पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) सब्सक्राइबर्स के लिए 'रिटायरमेंट इनकम स्कीम' (RIS) पेश की है। यह नई सुविधा रिटायरमेंट के बाद पैसों के बेहतर मैनेजमेंट में काफी मददगार साबित होगी। अब रिटायर होने वाले सब्सक्राइबर्स को अपने 60 फीसदी लंपसम (एकमुश्त) फंड को एक साथ निकालने की जरूरत नहीं है, बल्कि वे 'सिस्टमैटिक ड्रॉडाउन' प्रक्रिया के जरिए इसे किस्तों में ले सकते हैं। इससे न केवल आपकी मंथली इनकम का इंतजाम हो जाएगा, बल्कि आपका बचा हुआ पैसा मार्केट-लिंक्ड एसेट्स में निवेशित रहकर बढ़ता भी रहेगा। यह रिटायरमेंट के बाद आपके फंड पर आपको बेहतर कंट्रोल देता है।
यह सुविधा उन लाखों यूजर्स की जरूरतों को पूरा करती है जो कैश के मामले में लचीलापन चाहते हैं। पुराने नियमों के तहत रिटायरमेंट पर लंपसम अमाउंट तुरंत निकालना अनिवार्य था। अब आप सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) की तरह अपनी पसंद के अंतराल पर पेमेंट ले सकते हैं। इससे मार्केट रिटर्न का फायदा गंवाए बिना नकदी की जरूरतें पूरी की जा सकती हैं। रिटायरमेंट के बाद भी आपके फंड में मार्केट-लिंक्ड ग्रोथ जारी रह सकती है। भारतीय पेंशन सेक्टर के लिए यह एक बड़ा बदलाव है, जो आज के सीनियर सिटीजन्स को निवेश के ज्यादा विकल्प देता है।
ट्रेडिशनल एन्युइटी के मुकाबले NPS ड्रॉडाउन क्यों है बेहतर?
पारंपरिक एन्युइटी प्लान में जीवनभर के लिए एक फिक्स्ड पेमेंट की गारंटी तो मिलती है, लेकिन अक्सर ये बढ़ती महंगाई के मुकाबले कम पड़ जाते हैं। वहीं, सिस्टमैटिक ड्रॉडाउन में आपका पैसा इक्विटी और डेट में लगा रहता है, जिससे भविष्य में एक बड़ा फंड तैयार होने की संभावना रहती है। फिक्स्ड पेंशन स्कीमों में ग्रोथ की ऐसी गुंजाइश नहीं होती। हालांकि, सब्सक्राइबर्स को यह ध्यान रखना चाहिए कि मार्केट का प्रदर्शन हमेशा एक जैसा नहीं रहता, इसलिए स्विच करने से पहले अपनी रिस्क लेने की क्षमता को जरूर परख लें।
| फीचर | एन्युइटी प्लान | सिस्टमैटिक ड्रॉडाउन |
|---|---|---|
| रिटर्न | फिक्स्ड रिटर्न | मार्केट लिंक्ड |
| टैक्स स्टेटस | टैक्सेबल पेंशन | टैक्स फ्री लिमिट |
| फ्लेक्सिबिलिटी | कम लचीलापन | ज्यादा लचीलापन |
टैक्स में बचत और CRA पोर्टल पर एक्टिवेशन का तरीका
इस फीचर को सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसी (CRA) पोर्टल पर आसानी से एक्टिवेट किया जा सकता है। एग्जिट प्रोसेस के दौरान सब्सक्राइबर्स CRA सिस्टम के जरिए ड्रॉडाउन का विकल्प चुन सकते हैं। मौजूदा कानूनों के तहत, 60 फीसदी तक की निकासी पूरी तरह टैक्स-फ्री है, जो RIS को वेल्थ मैनेजमेंट का एक बेहतरीन टूल बनाती है। आप अपनी जरूरत के हिसाब से मंथली, क्वार्टरली या हाफ-ईयरली पेमेंट शेड्यूल कर सकते हैं। यह बिल्कुल एक स्टैंडर्ड मंथली पेंशन की तरह काम करता है, जिसमें टैक्स बचत एक बड़ा फायदा है।
इस स्कीम में सबसे अहम कदम मार्केट रिस्क को मैनेज करना है। इक्विटी में निवेश से ग्रोथ तो मिलती है, लेकिन इसमें उतार-चढ़ाव का जोखिम भी रहता है। मार्केट गिरने की स्थिति में आपकी मंथली पेमेंट की राशि कम हो सकती है। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि अपने कुछ खर्चों के लिए सुरक्षित डेट फंड्स का सहारा लें। NPS आपको इन एसेट क्लासेज का एक बैलेंस मिक्स बनाने की सुविधा देता है। यह रणनीति मुश्किल समय में सुरक्षा कवच का काम करती है और एक सुरक्षित और सम्मानजनक रिटायरमेंट सुनिश्चित करती है।
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