अगर आप हाईवे पर सफर करते समय कभी टोल देने से बच जाते हैं, तो अब ऐसा करना महंगा पड़ सकता है। सरकार ने टोल वसूली को और मजबूत बनाने के लिए नया डिजिटल सिस्टम लागू किया है, जिससे बिना भुगतान किए निकलने वाले वाहनों पर तुरंत कार्रवाई हो सकेगी।

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क्या कहता है नया नियम?

सड़क परिवहन से जुड़े नियमों में बदलाव करते हुए Ministry of Road Transport and Highways ने टोल कलेक्शन प्रक्रिया को डिजिटल बना दिया है। इस बदलाव का मकसद है कि टोल वसूली में पारदर्शिता आए और कोई भी वाहन बिना भुगतान के न निकल पाए। यह नियम हाल ही में लागू हुआ है और अब देशभर के हाईवे पर धीरे-धीरे इसका असर दिखने लगा है।

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कैसे मिलेगा ई-नोटिस?

अगर कोई वाहन टोल प्लाजा से गुजरते समय भुगतान नहीं करता, तो सिस्टम तुरंत उसे रिकॉर्ड कर लेगा। इसके बाद वाहन मालिक को ई-नोटिस भेजा जाएगा।

इस नोटिस में शामिल होगी:

गाड़ी का नंबर

कब और कहां टोल पार किया गया

कितनी राशि बाकी है

यह जानकारी SMS, ईमेल या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भेजी जाएगी, ताकि वाहन मालिक तुरंत अपडेट हो सके।

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समय पर भुगतान करने पर राहत

सरकार ने वाहन चालकों को थोड़ी राहत भी दी है। अगर आप नोटिस मिलने के बाद 72 घंटे के अंदर भुगतान कर देते हैं, तो आपको सिर्फ सामान्य टोल ही देना होगा। इस दौरान कोई अतिरिक्त जुर्माना नहीं लगेगा, जिससे लोगों को सुधार का मौका मिलता है।

देरी की तो बढ़ेगा जुर्माना

अगर आप तय समय के अंदर भुगतान नहीं करते हैं, तो आपको दोगुना टोल देना पड़ सकता है। यानी जितना टोल था, उसका दोगुना भरना होगा।

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ज्यादा देरी पर सख्त कदम

अगर 15 दिन तक भी भुगतान नहीं किया गया, तो मामला और गंभीर हो सकता है। बकाया राशि को VAHAN database में दर्ज कर लिया जाएगा। इसके बाद गाड़ी से जुड़े काम अटक सकते हैं। रजिस्ट्रेशन या अन्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है।

क्यों जरूरी था यह बदलाव?

सरकार अब बैरियर-फ्री टोल सिस्टम को बढ़ावा दे रही है, जहां गाड़ियां बिना रुके निकल सकती हैं। ऐसे में जरूरी हो गया था कि भुगतान की निगरानी डिजिटल तरीके से की जाए, ताकि कोई भी नियमों का उल्लंघन न कर सके।

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वाहन चालकों के लिए जरूरी सलाह

टोल पार करते समय भुगतान जरूर करें

नोटिस मिलने पर तुरंत एक्शन लें

देरी से बचें ताकि जुर्माना न लगे

ऑनलाइन सिस्टम का सही इस्तेमाल करें

नए नियम के बाद अब टोल से बचना आसान नहीं है। डिजिटल निगरानी के कारण हर वाहन पर नजर रखी जा रही है। इसलिए समझदारी इसी में है कि नियमों का पालन करें और अतिरिक्त खर्च से बचें।