New Income Tax Rule: देश में लागू टैक्स व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं और यही कारण है कि इसके रिफॉर्म को लेकर लगातार मांग की जाती रही है। ऐसे में केंद्र सरकार ने हाल ही में नई टैक्स व्यवस्था को लेकर नया कानून बनाया है जिसके लागू किए जाने को लेकर अब बड़ी खबर सामने आई है।

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देश में नई टैक्स व्यवस्था में अब एक बड़ा बदलाव आने वाला है, जो करदाताओं के लिए प्रक्रियाओं को काफी सरल बना देगा। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिससे टैक्स कंप्लायंस पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगा।

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कब से लागू होगा नया आयकर नियम?

सीबीडीटी जनवरी 2026 तक सरलीकृत आयकर अधिनियम 2025 के तहत नए आईटीआर फॉर्म और नियमों को अधिसूचित करेगा। यह कानून 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा, जिसका उद्देश्य पुरानी जटिल धाराओं को हटाकर प्रावधानों को आधुनिक और करदाता-अनुकूल बनाना है।

सीबीडीटी प्रमुख रवि अग्रवाल ने सोमवार को घोषणा की कि नए आयकर अधिनियम, 2025 के तहत आईटीआर फॉर्म और संबंधित नियम जनवरी 2026 तक अधिसूचित कर दिए जाएंगे। यह कानून वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत यानी 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा।

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नया अधिनियम, जिसे संसद ने 12 अगस्त 2025 को पारित किया था, 1961 के छह दशक पुराने आयकर कानून का स्थान लेगा। इसका मुख्य उद्देश्य लंबे समय से जटिल होते आ रहे टैक्स प्रावधानों को आसान बनाना, अनावश्यक शब्दावली को हटाना और कानून को सरल तथा समझने योग्य बनाना है।

आईटीआर फॉर्म्स को बनाया जा रहा बहुत सरल: सीबीडीटी प्रमुख

आईआईटीएफ (इंडियन इंटरनेशनल ट्रेड फेयर) में 'टैक्सपेयर्स लाउंज' के उद्घाटन के दौरान सीबीडीटी प्रमुख अग्रवाल ने बताया कि नए अधिनियम के लिए आईटीआर फॉर्म्स को बहुत सरल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, "हम फॉर्म और नियम तैयार करने की प्रक्रिया में हैं और जनवरी तक इन्हें लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं, ताकि करदाताओं को अपनी प्रणाली के भीतर बदलाव करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।"

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आईटीआर फॉर्म का यह नया फॉर्मेट करदाताओं के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा। इससे आईटीआर भरने की जटिलता कम होगी, जानकारी की पुनरावृत्ति (डुप्लीकेशन) समाप्त होगी, और डिजिटल फॉर्मेट व प्री-फिल्ड डेटा में सुधार किया जाएगा। यह छोटे करदाताओं के लिए अनुपालन को और भी आसान बना देगा।

सीबीडीटी प्रमुख रवि अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि नया कानून सिर्फ आईटीआर तक सीमित नहीं है। टीडीएस त्रैमासिक रिटर्न फॉर्म, आईटीआर फॉर्म और अन्य संबंधित विनियमों को भी नए कानून के अनुरूप री-डिजाइन किया जा रहा है। इस कार्य में डायरेक्टोरेट ऑफ सिस्टम्स और टैक्स पॉलिसी डिपार्टमेंट मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि प्रक्रिया को करदाता-अनुकूल बनाया जा सके।

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नए आयकर नियम में किए गए हैं ये अहम बदलाव

नए आयकर अधिनियम, 2025 में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। यह अधिनियम कर दरों में कोई बदलाव नहीं करता, बल्कि केवल भाषा और प्रावधानों को सरल बनाता है। 1961 के कानून की 819 धाराओं को घटाकर 536 कर दिया गया है, जबकि अध्यायों की संख्या 47 से घटाकर 23 कर दी गई है।

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पुराने कानून में कुल शब्दों की संख्या 5.12 लाख थी, जिसे घटाकर 2.6 लाख कर दिया गया है, जिससे कानून को पढ़ना और समझना बेहद सरल हो जाएगा। स्पष्टता बढ़ाने के लिए इसमें 39 नई सारणियां और 40 नए सूत्र भी जोड़े गए हैं, जो प्रावधानों को अधिक पारदर्शी और तार्किक बनाते हैं।

सीबीडीटी प्रमुख के अनुसार, इन नियमों को विधि विभाग द्वारा जांचा जाएगा और फिर संसद के समक्ष रखा जाएगा। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि नए कानून के लागू होने से पहले सभी मंत्रालय, विभाग और करदाताओं को अपने सिस्टम अपडेट करने का पर्याप्त समय मिल सके।

टैक्सपेयर्स के लिए बढ़ेगी सहूलियतें

यह नया कानून कर प्रक्रिया को आधुनिक, डिजिटल और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाएगा। इससे कर रिटर्न भरना आसान होगा, कम धाराओं और सरल भाषा से भ्रम कम होगा, पुराने प्रावधानों की गड़बड़ी खत्म होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और अनुपालन लागत कम होगी।

आयकर अधिनियम, 2025 भारत की टैक्स व्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। जनवरी तक आईटीआर फॉर्म और नए नियमों की अधिसूचना आने के बाद, देश के करदाताओं के लिए पूरी टैक्स प्रक्रिया और अधिक सरल, तेज और स्पष्ट हो जाएगी। यह बदलाव भारत की टैक्स प्रणाली को आधुनिक युग के अनुरूप बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।