म्यूचुअल फंड इनफ्लो में बड़ी गिरावट: क्या SIP बंद करें या जारी रखें? जानें सही रणनीति

मई के महीने में इक्विटी म्यूचुअल फंड इनफ्लो गिरकर एक साल के निचले स्तर पर आ गया है। निवेश में आई यह अचानक कमी भारतीय रिटेल निवेशकों के बीच बढ़ती सावधानी को दिखाती है। बाजार के जानकारों का मानना है कि हाई वैल्यूएशन और ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता इसकी मुख्य वजहें हैं। यह ट्रेंड अक्सर घरेलू बाजारों में एक अस्थायी सुस्ती का संकेत देता है। निवेशकों को बाजार का मूड समझने के लिए इन आंकड़ों पर पैनी नजर रखनी चाहिए।

भले ही कुल इनफ्लो में गिरावट आई हो, लेकिन SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के जरिए होने वाले निवेश में जबरदस्त मजबूती देखी गई। हर महीने निवेश होने वाली यह रकम म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए एक भरोसेमंद आधार बनी हुई है। दूसरी ओर, एकमुश्त (Lumpsum) निवेश करने वाले लोग फिलहाल बाजार से दूरी बनाए हुए हैं ताकि वे ऊपरी स्तरों पर खरीदारी से बच सकें। यह अंतर दिखाता है कि छोटे निवेशक अब काफी अनुशासित हो गए हैं। बाजार के ऐसे अनिश्चित दौर में निवेश की निरंतरता बनाए रखना ही सफलता की कुंजी है।

Mutual Fund Inflow Drops to 1-Year Low: Should You Stop SIP or Continue Investing? Expert Strategy

मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स में गिरावट के जोखिम को कैसे संभालें?

पिछले महीने स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड्स में सबसे ज्यादा सुस्ती देखी गई। अक्सर जब बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ता है, तो निवेशक इन हाई-रिस्क वाले फंड्स से पीछे हटने लगते हैं। हालिया डेटा संकेत दे रहा है कि अब निवेशकों का रुझान लार्ज-कैप की स्थिरता या लिक्विड एसेट्स की तरफ बढ़ रहा है। इस बदलाव से साफ है कि फिलहाल निवेशकों के लिए सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इन पैटर्न्स को समझकर आप अपने पोर्टफोलियो के लिए बेहतर फैसले ले सकते हैं।

फंड कैटेगरीइनफ्लो पर असररिटेल निवेशकों का रुख
स्मॉल-कैप फंड्सभारी गिरावटएकमुश्त निवेश से बचें
मिड-कैप फंड्समामूली गिरावटSIP जारी रखें
लार्ज-कैप फंड्सस्थिर रुझानपोजीशन बनाए रखें

टैक्स सेविंग के लिए ELSS निवेश को ऐसे करें बेहतर

नौकरीपेशा लोगों को अपने ELSS (इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम) के लक्ष्यों पर अभी से गौर करना चाहिए। ये टैक्स-सेविंग इंस्ट्रूमेंट्स इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के दायरे में आते हैं। इनफ्लो में आई इस अस्थायी गिरावट से इनके लॉन्ग-टर्म मुनाफे पर कोई असर नहीं पड़ता। बाजार की उठापटक के दौरान अपने इक्विटी पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करना आपकी पूंजी को सुरक्षित रख सकता है। अच्छे फंड्स में चल रही अपनी एक्टिव SIP को बंद करने की जल्दबाजी न करें।

बदलते बाजार में निरंतरता ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है। शॉर्ट-टर्म के उतार-चढ़ाव को अपनी लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन की राह में रोड़ा न बनने दें। एक्सपर्ट्स हमेशा 'रुपी कॉस्ट एवरेजिंग' का फायदा उठाने के लिए निवेश पर टिके रहने की सलाह देते हैं। इस समय का उपयोग अपनी रिस्क लेने की क्षमता और फाइनेंशियल गोल्स को रिव्यू करने के लिए करें। एक बैलेंस अप्रोच आपको बाजार के हर उतार-चढ़ाव के बावजूद आगे बढ़ने में मदद करेगी।

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