मोतीलाल ओसवाल म्यूचुअल फंड (Motilal Oswal Mutual Fund) अपना नया 'मोतीलाल ओसवाल कॉन्ट्रा फंड' (Motilal Oswal Contra Fund) लेकर आया है। यह एक ओपन-एंडेड इक्विटी स्कीम है जो कॉन्ट्रेरियन इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी (बाजार की भेड़चाल से अलग चलने वाली रणनीति) पर काम करती है। इस फंड का NFO 8 मई, 2026 को खुलेगा और 22 मई, 2026 को बंद होगा। फंड हाउस ने इसकी टाइमिंग बहुत सोच-समझकर चुनी है। 2026 में भारतीय शेयर बाजार काफी उतार-चढ़ाव भरे दौर से गुजर रहा है, और फंड हाउस का मानना है कि ऐसी अस्थिरता ही उन 'छिपे हुए हीरों' को खोजने का सही मौका होती है जिनकी कीमत फिलहाल कम है।

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क्या है मोतीलाल ओसवाल कॉन्ट्रा फंड की स्ट्रैटेजी?

कॉन्ट्रेरियन स्ट्रैटेजी निवेश का वह तरीका है जिसमें बाजार के मौजूदा ट्रेंड के उलट जाकर निवेश किया जाता है। इसका मकसद उन कंपनियों में मौके तलाशना है जो फिलहाल बाजार की नजरों से दूर हैं या अस्थायी रूप से सस्ती मिल रही हैं, लेकिन उनकी बुनियाद (फंडामेंटल्स) मजबूत है और लंबे समय में वे शानदार वापसी कर सकती हैं। यह फंड 30 से 35 ऐसे चुनिंदा शेयरों का पोर्टफोलियो बनाने पर ध्यान केंद्रित करेगा जिनमें मजबूत ऑपरेटिंग कैश फ्लो, आकर्षक वैल्यूएशन और भविष्य में ग्रोथ की पूरी संभावना हो।

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कॉन्ट्रा फंड के पीछे QGLP का दम

मोतीलाल ओसवाल इस फंड के लिए अपने खास QGLP फ्रेमवर्क का इस्तेमाल करता है, जिसका मतलब है- क्वालिटी (Quality), ग्रोथ (Growth), लोंगेविटी (Longevity) और प्राइस (Price)। इसमें देखा जाता है कि क्या बिजनेस की क्वालिटी अच्छी है, उसमें आगे बढ़ने का दम है, क्या वह लंबे समय तक टिक पाएगा और क्या उसकी मौजूदा कीमत वाजिब है। किसी भी शेयर को पोर्टफोलियो में जगह तभी मिलती है जब वह कॉन्ट्रेरियन चेक और QGLP फिल्टर, दोनों पर खरा उतरता है। यह स्कीम उन कंपनियों में निवेश करेगी जो फंडामेंटली तो मजबूत हैं, लेकिन बाजार की धारणा या शॉर्ट-टर्म कारणों से फिलहाल अपनी असली कीमत से कम पर मिल रही हैं।

मोतीलाल ओसवाल कॉन्ट्रा फंड NFO की खास बातें

विवरणजानकारी
NFO खुलने की तारीख8 मई, 2026
NFO बंद होने की तारीख22 मई, 2026
न्यूनतम निवेश500 रुपये (एकमुश्त और SIP)
ऑफर के दौरान NAV10 रुपये प्रति यूनिट
बेंचमार्कनिफ्टी 500 टोटल रिटर्न इंडेक्स (Nifty 500 TRI)
एग्जिट लोड365 दिनों के भीतर निकालने पर 1%
जोखिम का स्तरबहुत अधिक (Very High)
पोर्टफोलियो का आकार30 से 35 शेयर

मोतीलाल ओसवाल कॉन्ट्रा फंड और SEBI के नए एक्सपेंस नियम

यह फंड ऐसे समय में लॉन्च हो रहा है जब नियम बदल रहे हैं। SEBI के नए म्यूचुअल फंड नियम 1 अप्रैल, 2026 से लागू हो चुके हैं, जिसमें पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 'बेस एक्सपेंस रेशियो' (Base Expense Ratio) फ्रेमवर्क पेश किया गया है। अब पुराने 'टोटल एक्सपेंस रेशियो' (TER) की जगह बेस एक्सपेंस रेशियो मॉडल ने ले ली है। इसमें परफॉर्मेंस-लिंक्ड फीस का विकल्प भी है और ट्रस्टियों व सीनियर मैनेजमेंट की जिम्मेदारी भी बढ़ाई गई है। SIP निवेशकों के लिए यह इसलिए अहम है क्योंकि खर्चों में स्पष्टता का सीधा असर उनके रिटर्न और फंड्स की तुलना करने के तरीके पर पड़ता है।

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आपके लिए क्या हैं नए BER फ्रेमवर्क के मायने?

एक बड़े बदलाव के तहत, अब 'बेस एक्सपेंस रेशियो' (BER) में केवल वही फीस शामिल होगी जो AMC निवेशकों के पैसे मैनेज करने के लिए लेती है। ब्रोकरेज, सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT), स्टैम्प ड्यूटी और एक्सचेंज फीस जैसे अन्य खर्च अब अलग से दिखाए जाएंगे, जबकि पहले ये सब टोटल एक्सपेंस रेशियो में ही शामिल होते थे। SEBI ने यह भी साफ कर दिया है कि अलॉटमेंट तक NFO से जुड़ा कोई भी खर्च AMC, ट्रस्टी या स्पॉन्सर को ही उठाना होगा और वे इसे किसी भी हाल में निवेशकों से नहीं वसूल सकते।

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क्या SIP निवेशकों के लिए सही है यह कॉन्ट्रा फंड?

MOAMC के एमडी और सीईओ प्रतीक अग्रवाल का कहना है कि बाजार में कई बार लोगों के व्यवहार और कुछ बाहरी कारणों से शेयरों की कीमतें गलत तय हो जाती हैं। उतार-चढ़ाव के दौर में कॉन्ट्रा स्ट्रैटेजी मौजूदा शोर से हटकर बिजनेस की लंबी अवधि की मजबूती पर ध्यान देने में मदद करती है। उन्होंने बताया कि यह फंड उन कंपनियों में शुरुआती मौके तलाशने के लिए बनाया गया है जिनका वैल्यूएशन वाजिब है। यह एक एक्टिवली मैनेज्ड फंड है जो अलग-अलग मार्केट कैप वाली कंपनियों में निवेश करेगा, ताकि उन धैर्यवान निवेशकों को फायदा मिल सके जो 3 से 5 साल तक निवेशित रह सकते हैं।

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कैसा रहा है दूसरे कॉन्ट्रा फंड्स का प्रदर्शन?

कॉन्ट्रा फंड कैटेगरी में कोटक कॉन्ट्रा फंड, SBI कॉन्ट्रा फंड और इन्वेस्को इंडिया कॉन्ट्रा फंड जैसे खिलाड़ियों के नतीजे अलग-अलग रहे हैं। उदाहरण के लिए, SBI कॉन्ट्रा फंड ने 5 साल में 20.25% का रिटर्न दिया है, जबकि कोटक कॉन्ट्रा फंड ने 3 साल में 20.05% का रिटर्न हासिल किया है। SBI कॉन्ट्रा फंड इस कैटेगरी का सबसे बड़ा फंड है, जिसका AUM 43,754 करोड़ रुपये और एक्सपेंस रेशियो 1.48% है। इस NFO जैसे नए फंड्स एक नई शुरुआत के साथ आते हैं, लेकिन उनके पास दिखाने के लिए कोई पुराना ट्रैक रिकॉर्ड नहीं होता।

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हर SIP निवेशक के लिए जरूरी जोखिम

सबसे बड़ी चुनौती यह पहचानना है कि बाजार में आई गिरावट अस्थायी है या कंपनी की वैल्यू में स्थायी कमी आई है, क्योंकि गलत चुनाव 'वैल्यू ट्रैप' साबित हो सकता है। इसके अलावा, फोकस्ड पोर्टफोलियो होने के कारण अगर कुछ शेयर गलत साबित हुए, तो पूरे रिटर्न पर बड़ा असर पड़ सकता है। 2026 के टैक्स नियमों के अनुसार, 12 महीने के भीतर पैसा निकालने पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) पर 20% टैक्स लगेगा। वहीं, एक वित्तीय वर्ष में 1.25 लाख रुपये से अधिक के लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) पर बिना इंडेक्सेशन लाभ के 12.5% टैक्स देना होगा।

NFO के दौरान न्यूनतम निवेश 500 रुपये है और इसके बाद भी 500 रुपये के गुणकों में निवेश किया जा सकता है। अगर आप अलॉटमेंट की तारीख से 365 दिनों के भीतर पैसा निकालते हैं, तो 1 प्रतिशत एग्जिट लोड लगेगा, लेकिन 365 दिनों के बाद कोई लोड नहीं है। कॉन्ट्रा फंड में निवेश करने वाले SIP निवेशकों के लिए असली परीक्षा धैर्य की है। इस फंड का असली फायदा देखने के लिए आपको कम से कम पांच साल तक निवेशित रहने की जरूरत है। ऐसे बाजार में जहां ज्यादातर लोग भीड़ के पीछे भागते हैं, एक अनुशासित कॉन्ट्रा अप्रोच लंबी अवधि का दांव है, न कि तुरंत मुनाफा कमाने का जरिया।