Ladli Behna Yojana: मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए एक बार फिर खुशखबरी आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लाडली बहना योजना की 30वीं किस्त जारी करते हुए घोषणा की है कि अब हर ऐलीजिबल महिला को हर महीने 1500 रुपए मिलेंगे। पहले यह राशि 1250 रुपए थी, जिसे अब बढ़ाकर 1500 रुपए किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना सिर्फ आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

Advertisement

1. लाखों महिलाओं को सीधा फायदा

इस योजना का फायदा इस समय राज्य की लगभग 1.26 करोड़ महिलाओं को मिल रहा है। सिवनी जिले की ही 2.68 लाख से अधिक बहनों के खातों में अब तक कुल 1857 करोड़ रुपए भेजे जा चुके हैं। सरकार का कहना है कि योजना से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में बड़ी मदद मिली है और इसका असर परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भी साफ दिखाई दे रहा है।

Advertisement

2. कैसे बदली महिलाओं की ज़िंदगी

लाडली बहना योजना से मिली आर्थिक सहायता से कई महिलाओं ने अपने छोटे कारोबार शुरू किए हैं। कोई घर पर ब्यूटी पार्लर चला रही है, तो कोई सिलाई, बुनाई या घरेलू उत्पाद बनाकर बेच रही है। कई बहनों ने बताया कि इस राशि से बच्चों की पढ़ाई और घर के जरूरी खर्च पूरे करने में काफी मदद मिली है। यह योजना अब महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने वाली पहल बन चुकी है।

Advertisement

3. पैसे आने की स्थिति ऐसे जांचें

अगर किसी लाभार्थी को अब तक पैसा नहीं मिला है, तो वह योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना भुगतान स्टेटस देख सकती हैं।

पोर्टल पर "आवेदन एवं भुगतान की स्थिति" विकल्प चुनें।

अपना पंजीकरण नंबर या आईडी दर्ज करें।

फिर मोबाइल पर आए OTP से लॉगिन करें और तुरंत जानकारी प्राप्त करें।

4. विकास परियोजनाओं की सौगात भी

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य में 560 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाले 114 विकास कार्यों का शुभारंभ और लोकार्पण किया। इनमें सड़कें, पुल, खेल मैदान और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।

Advertisement

5. महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में कदम

मुख्यमंत्री ने कहा कि सशक्त महिला ही मजबूत समाज और सशक्त मध्य प्रदेश की नींव है। सरकार का उद्देश्य है कि हर बहन आत्मनिर्भर बने और अपने जीवन में आगे बढ़े।

लाडली बहना योजना ने मध्य प्रदेश की महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। हर महीने मिलने वाले 1500 रुपए की यह सहायता उन्हें न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बना रही है, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में भी आगे बढ़ा रही है।