31 जुलाई की इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) डेडलाइन में अब बस कुछ ही दिन बचे हैं, जिससे पोर्टल पर ट्रैफिक का दबाव काफी बढ़ गया है। रविवार, 26 जुलाई 2026 तक कई टैक्सपेयर्स ने ई-फाइलिंग पोर्टल के धीमे होने और पेमेंट या ई-वेरिफिकेशन में आ रही दिक्कतों की शिकायत की है। आखिरी समय की भागदौड़ और तनाव से बचने, क्रेडिट मिसमैच ठीक करने और समय पर रिफंड पाने के लिए यहाँ कुछ जरूरी टिप्स दिए गए हैं।

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सबसे पहले अपनी डेडलाइन जान लें। ज्यादातर सैलरीड क्लास (salaried) के लिए आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है। वहीं, नॉन-ऑडिट बिजनेस और कुछ खास ट्रस्ट्स के लिए सरकार ने इस तारीख को बढ़ाकर 31 अगस्त 2026 कर दिया है। याद रखें कि रिफंड की प्रक्रिया तभी शुरू होती है जब आप रिटर्न को ई-वेरिफाई कर देते हैं, इसलिए फाइलिंग के तुरंत बाद यह स्टेप पूरा करना न भूलें।

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ITR फाइलिंग में आ रही है दिक्कत? अपनाएं ये स्मार्ट टिप्स

पोर्टल पर ट्रैफिक कम होने के समय, जैसे सुबह जल्दी या देर रात को फाइलिंग करें, इस दौरान वेबसाइट ज्यादा स्मूथ चलती है। हर स्टेप के बाद ड्राफ्ट सेव करते रहें। अगर कोई सेक्शन लोड होने में दिक्कत करे, तो कैशे (cache) क्लियर कर दें। फॉर्म 16, फॉर्म 26AS, AIS और TIS को पहले ही डाउनलोड करके रख लें। इससे बार-बार पेज लोड होने की समस्या नहीं होगी और सेशन टाइम-आउट होने पर भी आप वहीं से काम शुरू कर पाएंगे।

AIS/TIS और 26AS में है अंतर? ऐसे करें तुरंत ठीक

AIS और TIS को एक साथ खोलें और फॉर्म 26AS से उनका मिलान करें। अगर कोई जानकारी गलत या गायब है, तो AIS में अपना फीडबैक दें और डिडक्टर (deductor) से उसे ठीक करने को कहें। फाइलिंग के दौरान केवल वही क्रेडिट क्लेम करें जो 26AS में दिख रहा है, क्योंकि पोर्टल आमतौर पर इसी के आधार पर क्रेडिट लिमिट तय करता है। अगर कन्फ्यूजन बना रहे, तो 'Tax Credit Mismatch' हेल्प सेक्शन की मदद लें।

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पेमेंट और ई-वेरिफिकेशन के लिए सुरक्षित तरीके

ई-फाइलिंग पोर्टल पर अधिकृत बैंकों के जरिए 'e-Pay Tax' का इस्तेमाल करें। अगर पेमेंट गेटवे धीमा है, तो नेट-बैंकिंग या विभाग द्वारा बताए गए अन्य विकल्पों को चुनें। अगर आपने टैक्स भर दिया है लेकिन वह पोर्टल पर नहीं दिख रहा, तो फाइलिंग के समय चालान की जानकारी खुद भरें या पोर्टल पर शिकायत (grievance) दर्ज करें। ई-वेरिफिकेशन के लिए आधार OTP, नेट-बैंकिंग, बैंक EVC, डीमैट EVC या DSC का इस्तेमाल किया जा सकता है।

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लेट फीस, ब्याज और रिफंड: क्या हैं नियम?

अगर आप डेडलाइन चूक जाते हैं, तो सेक्शन 234F के तहत 5,000 रुपये तक की लेट फीस लग सकती है (5 लाख रुपये से कम आय होने पर यह 1,000 रुपये है)। टैक्स बकाया होने पर ब्याज भी देना पड़ सकता है। सेक्शन 143(1) के तहत रिटर्न प्रोसेस होने के बाद ही रिफंड जारी किया जाता है। आप अपने अकाउंट में रिफंड स्टेटस ट्रैक कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर पोर्टल के ग्रीवेंस मॉड्यूल के जरिए शिकायत कर सकते हैं।