किराए के घर में रहना कई बार एक कभी न खत्म होने वाले चक्र जैसा महसूस होता है। कम सैलरी वाले कई भारतीयों को लगता है कि अपनी सीमित कमाई में घर खरीदना नामुमकिन है। हालांकि, आज के दौर में ऐसे फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स मौजूद हैं, जो कम आय वाले लोगों के लिए भी घर का सपना पूरा करना आसान बना देते हैं। बस यह समझना जरूरी है कि बैंक आपके प्रोफाइल का आकलन कैसे करते हैं, ताकि आप इस सपने को हकीकत में बदल सकें।

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ज्यादातर बैंक होम लोन के लिए कम से कम 15,000 रुपये की मंथली इनकम की मांग करते हैं। आपकी लोन चुकाने की क्षमता को मापने के लिए बैंक आमतौर पर 'फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेशियो' (FOIR) का इस्तेमाल करते हैं। सामान्य तौर पर, बैंक यह सुनिश्चित करते हैं कि आपकी सभी किस्तों (EMIs) का कुल हिस्सा आपकी नेट सैलरी के 50 फीसदी से ज्यादा न हो। इससे कर्ज लेने वाले व्यक्ति पर बोझ नहीं पड़ता और वह लोन चुकाने के साथ-साथ अपने रोजमर्रा के खर्च भी आसानी से मैनेज कर पाता है।

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होम लोन पाने के लिए अपनाएं ये खास स्ट्रैटेजी

लोन की पात्रता (Eligibility) बढ़ाने का एक कारगर तरीका है लंबी अवधि (Tenure) का चुनाव करना। अगर आप लोन चुकाने की अवधि को 30 साल तक बढ़ा देते हैं, तो आपकी मंथली ईएमआई (EMI) काफी कम हो जाती है। इसके साथ ही, अपना सिबिल (CIBIL) स्कोर 700 से ऊपर बनाए रखना बेहद जरूरी है। एक अच्छा स्कोर आपकी विश्वसनीयता साबित करता है और बैंक आपको बेहतर ब्याज दरों पर लोन देने के लिए तैयार हो जाते हैं।

वर्किंग पार्टनर के साथ मिलकर जॉइंट लोन के लिए अप्लाई करना आपकी एलिजिबिलिटी को काफी बढ़ा सकता है। जब दो लोगों की इनकम जुड़ती है, तो बैंक ज्यादा बड़ा लोन अमाउंट अप्रूव कर देते हैं। इसके अलावा, पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड बिल जैसे छोटे कर्जों को पहले ही बंद कर देना आपके प्रोफाइल के लिए अच्छा रहता है। इससे आपकी वित्तीय देनदारियां कम होती हैं और बैंक का आप पर भरोसा बढ़ता है।

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होम लोन रिजेक्शन और शहरों के हिसाब से अफोर्डेबिलिटी को समझें

लोन की राशिअवधि (वर्ष)ब्याज दरमंथली EMI
Rs 20 Lakhs20 Years9%Rs 17,995
Rs 25 Lakhs25 Years9%Rs 20,979

भारत के बड़े महानगरों और छोटे शहरों में घर खरीदने का खर्च और अफोर्डेबिलिटी काफी अलग होती है। हैदराबाद या बेंगलुरु जैसे शहरों में रहने की लागत (Cost of Living) आपके फाइनल लोन अमाउंट पर असर डालती है। बैंक आपकी लोकेशन के आधार पर ही तय करते हैं कि आपको अधिकतम कितना फंड दिया जा सकता है। साथ ही, बार-बार नौकरी बदलने से बचें, क्योंकि भारतीय वित्तीय संस्थान जॉब स्टेबिलिटी को बहुत महत्व देते हैं।

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आज के समय में अपना घर होना सिर्फ ज्यादा कमाई करने वालों तक सीमित नहीं है। स्मार्ट प्लानिंग और को-बरोइंग के जरिए आप आसानी से जरूरी फंड जुटा सकते हैं। अलग-अलग स्कीमों की जानकारी रखें और अपने फाइनेंशियल रिकॉर्ड को दुरुस्त रखें ताकि लोन की प्रक्रिया आसान रहे। आज ही अपने सफर की शुरुआत करें और अपने परिवार के सुरक्षित भविष्य के लिए एक पक्की छत का इंतजाम करें।