Credit Card : आज के समय में क्रेडिट कार्ड होना लोगों की जरूरत सी बन गई है क्योंकि ये ऐसी चीज मानी जा रही है कि जरूरत के समय में ये तुरंत काम आता है। वहीं जिन लोगों के पास क्रेडिट कार्ड नहीं है वो भी इसको लेने का इरादा बना रहे हैं।
क्रेडिट कार्ड को लेकर अक्सर आपने देखा होगा ही लोग मेट्रो स्टेशन बस स्टैन्ड पर खड़े रहते हैं जो क्रेडिट कार्ड देने के बारे में समझा रहे होते हैं इतना ही नहीं आप लोगों के मोबाइल फोन पर बैंकों से रोजाना कॉल भी आते होंगे और बैंक के एजेंट क्रेडिट कार्ड की सारी उपलब्धियां भी बताते होंगे कई बार वो एजेंट ऐसे दावे भी करते हैं कि कार्ड बिल्कुल फ्री है और खर्च करने पर रिवॉर्ड पॉइंट भी मिलते हैं।
इन बैंकों में कुछ तो ऐसे हैं बैंक हैं जो सालाना चार्ज भी माफ कर देते हैं ये भी बताते हैं जिसमें आपको ये बहुत अच्छा सौदा लगता है और प्रीमियम कार्ड पर एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस जैसे कई और भी फायदे मिलते हैं।
क्रेडिट कार्ड कंपनियां किस तरह कमाई करती हैं
क्रेडिट कार्ड कंपनियों का काम करने का तरीका थोड़ा अलग है ये कुछ इस तरह काम करती हैं जिस तरह लोन देने के बिजनेस हो। क्रेडिट कार्ड कंपनियां ब्याज से कमाई करती हैं, कई बार ऐसा होता है कि क्रेडिट कार्ड लोन तो ले लेते हैं लेकिन उसे सही समय पर भरने में असफल हो जाते हैं जिससे आपको 30 से 50 प्रतिशत तक ब्याज चुकाना पड़ जाता है। कार्ड से कैश लेने में भी ज्यादा रकम का ब्याज देना पड़ता है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार पिछले साल अप्रैल से इस साल अप्रैल तक लोगों ने क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करके हर महीने 300-400 करोड़ रुपये निकाले। इससे पता चलता है कि इन कंपनियों के लिए नकद अडवांस आय का एक अच्छा स्रोत है।
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड
कॉलेज के छात्र भी छात्रों के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए क्रेडिट कार्ड के लिए पात्र हो सकते हैं। इन कार्डों में पात्रता की आवश्यकताएं होती हैं जैसे कि ट्रस्ट फ़ंड, वित्तीय संपत्ति या निवेश होना। बैंक खाता रखना और सभी आय स्रोतों का खुलासा करना, यहां तक कि अपरंपरागत स्रोतों का भी, क्रेडिट योग्यता को बढ़ावा दे सकता है। बैंक इसलिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड मुहैया करवाती है ताकि बच्चे उसका फायदा उठा सकें।
कई ऐसी कंपनियां है ग्राहकों से मेंबरशिप फीस भी लेती हैं
जब आप क्रेडिट कार्ड लेने के बारे में बात करेंगे तब आपसे कई सारे वादे किए जाते हैं लेकिन काई बार देखा होगा कि ये कंपनियां अपने ग्राहकों से एक मेंबरशिप फीस चार्ज करती हैं, कुछ ऐसे भी हैं जो चार्ज नहीं करते हैं, हर बैंकों के नियम और कानून अलग-अलग होते हैं कुछ बैंक तो इसे एनुअल फीस भी कहते हैं। इस तरह के चार्ज क्रेडिट कार्ड कंपनियों के लिए अच्छे होते हैं और ये उनकी कमाई का हिस्सा भी कहलाता है। ग्राहकों के लिए क्रेडिट कार्ड काफी अच्छा तो होता है लेकिन कई बार उसपे फीस बहुत ज्यादा लगती है।
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