HDFC बैंक ने 8 जून, 2026 को अपने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में बढ़ोतरी कर दी है। बैंक के इस फैसले का सीधा असर उन लाखों ग्राहकों पर पड़ेगा, जिनका होम या कार लोन पुराने MCLR सिस्टम से जुड़ा है। बैंक ने अलग-अलग अवधि के लोन पर दरों में 10 बेसिस पॉइंट्स तक का इजाफा किया है। इसका मतलब है कि अगली रीसेट डेट आते ही आपकी मंथली ईएमआई (EMI) बढ़ जाएगी।

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राहत की बात यह है कि इस बढ़ोतरी का असर सिर्फ पुराने MCLR सिस्टम वाले ग्राहकों पर होगा। जो लोग एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR) से जुड़े हैं, उन पर फिलहाल कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। बैंक हर महीने फंडिंग लागत के आधार पर इन दरों की समीक्षा करता है। आपकी ब्याज दर में बदलाव तभी होगा जब आपके लोन की 'रीसेट पीरियड' आएगी। आमतौर पर होम लोन में यह साइकिल छह महीने या एक साल की होती है।

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HDFC बैंक की ब्याज दरों में बढ़ोतरी: आपकी जेब पर कितना पड़ेगा बोझ?

सुनने में 10 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी मामूली लग सकती है, लेकिन लंबे समय में यह एक बड़ा अंतर पैदा करती है। उदाहरण के लिए, अगर आपने 20 साल के लिए 50 लाख रुपये का लोन लिया है, तो अब आपको हर महीने करीब 318 रुपये ज्यादा देने होंगे। पूरे लोन पीरियड के दौरान यह अतिरिक्त ब्याज लगभग 76,000 रुपये बैठता है। अपनी मौजूदा दर जानने के लिए अपना लेटेस्ट बैंक स्टेटमेंट जरूर चेक करें।

असर डालने वाले कारकविवरण
लोन की राशि₹50,00,000
लोन की अवधि20 साल
ब्याज दर में बढ़ोतरी10 बेसिस पॉइंट्स
अतिरिक्त EMI (हर महीने)~₹318 लगभग

इस वित्तीय बोझ को कम करने के लिए अपने लोन सैंक्शन लेटर को दोबारा देखें। वहां अपनी रीसेट डेट और 'स्प्रेड' (Spread) की जांच करें। अगर आप अपनी EMI को पहले जैसा ही रखना चाहते हैं, तो पार्ट-प्रीपेमेंट (Part-prepayment) करना एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है। इसके अलावा, अगर आपका स्प्रेड ज्यादा है, तो बैंक से इसे कम करने के लिए मोलभाव करें। कुछ ग्राहकों के लिए नए EBLR सिस्टम में स्विच करना भी फायदेमंद साबित हो सकता है।

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अक्सर देखा गया है कि HDFC बैंक के नक्शेकदम पर चलते हुए दूसरे बड़े बैंक भी अपनी ब्याज दरों में बदलाव करते हैं। इस ट्रेंड से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में कर्ज महंगा बना रह सकता है। अपनी फाइनेंशियल हेल्थ बनाए रखने के लिए अपने 'डेट-टू-इनकम' रेशियो पर नजर रखें। अगर आपका बैंक ज्यादा फीस वसूल रहा है, तो दूसरे बैंकों के रिफाइनेंस विकल्पों की तुलना करें। लंबी अवधि में बचत के लिए अपनी लोन अवधि और EMI के बीच सही तालमेल बिठाना बेहद जरूरी है।