HDFC Bank Rate Hike: अगर आपका होम लोन, पर्सनल लोन या कार लोन HDFC बैंक से जुड़ा है, तो आपकी EMI पर असर पड़ सकता है। देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंकों में से एक, HDFC बैंक ने अपनी MCLR दरें बढ़ा दी हैं। बैंक के इस फैसले के बाद नए लोन महंगे हो सकते हैं, और मौजूदा ग्राहकों के लिए भी रीसेट के बाद ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि बैंक ने किन अवधियों के लिए दरें बदली हैं और आपकी जेब पर इसका कितना असर पड़ सकता है।

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बैंक की ओर से यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब RBI ने अपनी हालिया मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा है।

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बैंक ने अलग-अलग अवधियों के लिए MCLR में 5 से 10 बेसिस पॉइंट्स (bps) की बढ़ोतरी की है। एक बेसिस पॉइंट का मतलब 0.01% होता है। इस नई बढ़ोतरी के बाद, HDFC बैंक की MCLR दरें 8.05% से 8.65% के बीच हो गई हैं।

HDFC बैंक के नई MCLR रेट

अवधि MCLR
ओवरनाइट8.10%
़1 महीना8.05%
3 महीने8.20%
6 महीने 8.35%
1 साल 8.40%
2 साल 8.55%
3 साल 8.65%

MCLR रेट का कर्ज लेने वालों पर क्या असर होगा?

2016 में शुरू की गई 'मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट' (MCLR) व्यवस्था ने पुरानी 'बेस रेट' व्यवस्था की जगह ली। फंड्स की मार्जिनल कॉस्ट (सीमांत लागत) पर आधारित यह रेट व्यवस्था बैंकों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक इंटरनल बेंचमार्क है, जिसे RBI तय करता है। मुख्य रूप से, यह वह कम-से-कम ब्याज दर है जिस पर बैंक ग्राहकों को लोन दे सकते हैं।

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आमतौर पर, RBI के दिशा-निर्देशों के अनुसार लेंडर (कर्ज देने वाले) MCLR रेट से कम पर लोन नहीं दे सकते। इसलिए, पर्सनल लोन समेत सभी लोन की दरें हर एक रुपया जुटाने में आने वाली अतिरिक्त लागत (इंक्रीमेंटल कॉस्ट) के आधार पर तय की जाती हैं।

अब, चूंकि ऊंची दरें लागू हो चुकी हैं, इसलिए MCLR-रेट से जुड़े लोन (जैसे ऑटो और अन्य पर्सनल लोन) लेने वालों की मासिक EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि (टेन्योर) लंबी हो सकती है, जब भी उनकी ब्याज दर अगली बार रीसेट होगी।