नौकरीपेशा लोगों के लिए एक अहम बदलाव सामने आया है। नए लेबर कोड के तहत ग्रेच्युटी से जुड़े नियमों को पहले से ज्यादा आसान बनाया गया है। इसका मतलब सबसे बड़ा फायदा उन कर्मचारियों को होगा, जो फिक्स्ड-टर्म या कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं। अब तक जहां ग्रेच्युटी के लिए लंबी सर्विस जरूरी मानी जाती यथी, वहीं, नए प्रावधानों से कम समय में भी यह फायदा मिल सकेगा।

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क्यों जरूरी था नियम बदलना

आज की जॉब मार्केट पहले जैसी नहीं रही। कई कंपनियां प्रोजेक्ट या तय समय के लिए कर्मचारियों को रखती हैं। ऐसे में कर्मचारी लंबे समय तक एक ही कंपनी में नहीं टिक पाते। सरकार ने इस सच्चाई को समझते हुए ग्रेच्युटी के नियमों में बदलाव किया है, ताकि कम समय की नौकरी करने वालों को भी आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

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ग्रेच्युटी क्या होती है

ग्रेच्युटी वह रकम होती है, जो कंपनी कर्मचारी को उसकी सेवा के बदले में देती है। यह आमतौर पर नौकरी छोड़ने या रिटायरमेंट के समय दी जाती है। पहले यह लाभ मुख्य रूप से स्थायी कर्मचारियों तक सीमित था, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ा दिया गया है।

एक साल में किसे मिलेगा फायदा

नए लेबर कोड के मुताबिक फिक्स्ड-टर्म और कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारी, अगर एक साल की सेवा पूरी कर लेते हैं, तो वे ग्रेच्युटी के हकदार बन सकते हैं। इससे पहले ऐसे कर्मचारियों को नौकरी खत्म होने पर कोई अतिरिक्त आर्थिक लाभ नहीं मिलता था।

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ग्रेच्युटी की कैलकुलेशन कैसे होती है

ग्रेच्युटी का हिसाब लगाना मुश्किल नहीं है। इसके लिए कर्मचारी की आखिरी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते को जोड़ा जाता है। इस कुल रकम को 15 से गुणा किया जाता है और फिर 26 से भाग दिया जाता है। यही तय फॉर्मूला है, जिससे ग्रेच्युटी की रकम निकलती है।

फॉर्मूले में 26 का मतलब

अक्सर लोग सोचते हैं कि 26 का आंकड़ा क्यों लिया जाता है। दरअसल नियमों के अनुसार एक महीने में औसतन 26 कामकाजी दिन माने जाते हैं। साप्ताहिक छुट्टियों को हटाने के बाद यही संख्या बचती है, इसलिए ग्रेच्युटी की गणना में 26 का इस्तेमाल होता है।

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25,000 रुपए सैलरी पर कितना मिलेगा

अगर किसी कर्मचारी की आखिरी बेसिक सैलरी 25,000 रुपए है और उसने एक साल काम किया है, तो ग्रेच्युटी का अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है। तय फॉर्मूले के अनुसार कर्मचारी को करीब 14,400 रुपए के आसपास ग्रेच्युटी मिल सकती है।

ग्रेच्युटी से जुड़े जरूरी नियम

अगर किसी कर्मचारी ने 6 महीने से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, तो उसे पूरा एक साल माना जाता है। यानी 11 महीने की नौकरी पर भी ग्रेच्युटी का अधिकार बन सकता है। सबसे अच्छी बात यह है कि ग्रेच्युटी की रकम पूरी तरह टैक्स फ्री होती है।

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कर्मचारियों के लिए क्यों है यह बदलाव अहम

यह बदलाव उन लाखों कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है, जो अस्थायी नौकरी करते हैं। इससे उन्हें नौकरी बदलने पर भी उनकी मेहनत का फायदा मिलेगा और भविष्य की आर्थिक योजना बनाना थोड़ा आसान हो जाएगा।