GST 2.0: केंद्र की मोदी सरकार ने पिछले हफ्ते जीएसटी दरों में बहुत बड़ा बदलाव कर दिवाली से पहले आम लोगों को बहुत बड़ी खुशखबरी दी थी। ऐसे में लोगों को उम्मीद है कि रोजमर्रा के चीजों के दाम बहुत जल्द सस्ते होंगे।

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नई जीएसटी व्यवस्था 22 सितंबर से लागू होगा। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि आखिर जीएसटी दरों में बदलाव से कौनसी चीज के दाम में कितने की कमी आएगी। यानी लोगों को कितने रुपये की बचत होगी। यदि आपके भी मन में ऐसे सवाल हैं तो घबराइए नहीं, क्योंकि सरकार ने इसका भी समाधान बताया है जहां आप फटाफट चेक कर सकते हैं कि किसी सामान को खरीदने पर आपको कितने की बचत हो सकती है। तो चलिए इसके बारे में जानते हैं और यह भी जानते हैं कि कैसे और कहां चेक कर सकते हैं...

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दरअसल, केंद्र सरकार ने एक डेडीकेटिड वेबसाइट 'savingwitgst.in' लॉन्च की है। इस वेबसाइट के जरिए उपभोक्ता 22 सितंबर को दरों में कटौती लागू होने से पहले और बाद में प्रोडक्ट्स की कीमतों की जांच और तुलना कर सकते हैं। सरकारी प्लेटफॉर्म MyGov ने इस वेबसाइट को लॉन्च किया है। इस वेबसाइट में कई कैटेगरीज दी गई हैं, जिनमें फूड प्रोडक्ट्स, नाश्ते की वस्तुएं, घरेलू सामान, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स, रसोई के सामान, मनोरंजन और लाइफस्टाइल से जुड़ी वस्तुएं शामिल हैं।

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MyGovIndia ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी साझा की है। X पर सरकार ने लिखा, "नेक्स्ट जेनरेशन का जीएसटी आ गया है! सोच रहे हैं कि आप कितनी बचत कर सकते हैं? अपनी पसंद की वस्तुएं कार्ट में डालें और खुद अंतर देखें। अभी देखने के लिए QR कोड स्कैन करें या http://savingswithgst.in पर जाएं!"

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कैसे चेक करें कौनसा सामान कितना सस्ता हुआ?

यदि आप किसी भी सामान की कीमत के बारे में जानना चाहते हैं कि कौनसा सामान कितना सस्ता हुआ और आपको कितनी बचत होगी तो यह देखने के लिए आपको सबसे पहले अपनी पसंदीदा सामान को कार्ट में डालना होगा।

इसके बाद कार्ट में बेस प्राइस, वैट के समय की कीमत और नेक्स्ट-जेन जीएसटी के बाद की कीमत दिखाई देगी। इस तरह से आप जान पाएंगे कि किस चीज पर आपको कितनी बचत होने वाली है।

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अब केवल 2 जीएसटी दरें होंगी

जीएसटी काउंसिल ने पिछले सप्ताह एक बड़ा फैसला लेते हुए पहले से जारी 4 जीएसटी स्लैब (5 फीसदी, 12 फीसदी, 18 फीसदी और 28 फीसदी) में दो स्लैब 12 फीसदी और 28 फीसदी को हटा दिया है। ऐसे में अब कवेल 2 स्लैब 5 फीसदी और 18 फीसदी को ही मंजूरी दी है।