भारतीय शेयर बाजार और सोने की कीमतों में आज जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इस उठापटक ने निवेशकों को अपनी इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी पर दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया है। अब SIP, FD और गोल्ड के बीच सही चुनाव करना काफी अहम हो गया है। बाजार की मौजूदा अस्थिरता को देखते हुए एक डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाना ही समझदारी है, ताकि आप महंगाई और ग्लोबल मार्केट के उतार-चढ़ाव से अपने पैसे को सुरक्षित रख सकें।

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इक्विटी मार्केट में ग्रोथ की संभावनाएं तो बहुत हैं, लेकिन रिटेल निवेशकों के लिए इसमें जोखिम भी कम नहीं है। दूसरी ओर, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में रिटर्न स्थिर रहता है, लेकिन अक्सर यह महंगाई को मात देने में पीछे रह जाता है। जहां SIP के जरिए लंबे समय में बड़ी पूंजी बनाई जा सकती है, वहीं FD इमरजेंसी फंड के लिए एक सुरक्षित विकल्प है। बाजार में आज जो हलचल दिखी है, उसने लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए इक्विटी वैल्यूएशन को काफी आकर्षक बना दिया है। ऐसे में गिरावट के दौरान वैल्यू बाइंग पर नजर रखना फायदेमंद हो सकता है।

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Gold vs SIP vs FD: जानें कहां कितना मिल रहा है रिटर्न

निवेश का प्रकारअनुमानित रिटर्नलिक्विडिटी (पैसे निकालने की सुविधा)
फिक्स्ड डिपॉजिट (FD)6.5% से 7.8%हाई
इक्विटी SIP12% से 15%मीडियम
फिजिकल गोल्ड8% से 11%मीडियम

आमतौर पर जब शेयर बाजार गिरता है, तो सोने की चमक बढ़ जाती है। यही वजह है कि आर्थिक अनिश्चितता के दौर में गोल्ड एक भरोसेमंद ढाल की तरह काम करता है। हालांकि, निवेश से पहले इन पर लगने वाले टैक्स को समझना भी जरूरी है। डेट फंड और FD से होने वाली कमाई पर आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। वहीं, सोने की शॉर्ट-टर्म खरीद-बिक्री के भी अपने टैक्स नियम हैं, जो आपके मुनाफे को कम कर सकते हैं।

Gold, SIP या FD: आपके लिए क्या है सही स्ट्रैटेजी?

अगर आप जोखिम नहीं लेना चाहते, तो बैंक FD के सुरक्षित रिटर्न के साथ बने रहना ही बेहतर है। वहीं, जो निवेशक थोड़ा रिस्क ले सकते हैं, उन्हें बाजार की गिरावट का फायदा उठाने के लिए अपनी SIP जारी रखनी चाहिए। एक संतुलित नजरिया अपनाते हुए अपने कुल निवेश का करीब 10 फीसदी हिस्सा सोने में रखना फायदेमंद हो सकता है। अगले कुछ महीनों तक ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स पर करीब से नजर रखें, ताकि आप किसी भी आर्थिक बदलाव के लिए पहले से तैयार रहें।