18 अप्रैल को सोने की कीमतों ने एक बार फिर नया रिकॉर्ड बनाया है। सोने की इस बढ़ती चमक ने भारतीय परिवारों को अपनी सेविंग्स की प्लानिंग पर दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया है। अब निवेशक इस उलझन में हैं कि पैसा बैंक डिपॉजिट में रखा जाए या सोने में निवेश किया जाए? सुरक्षित रिटर्न और सोने की जबरदस्त ग्रोथ के बीच सही तालमेल बिठाना आज के समय में बेहद जरूरी है।

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सुरक्षा के लिहाज से आज भी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रिकरिंग डिपॉजिट (RD) काफी लोकप्रिय हैं। इनमें रिटर्न की गारंटी तो मिलती है, लेकिन बढ़ती महंगाई के सामने अक्सर इनका मुनाफा कम पड़ जाता है। दूसरी ओर, वेल्थ क्रिएशन के लिए इक्विटी SIP एक शानदार विकल्प है। हालांकि, सोने की मौजूदा तेजी को देखते हुए गोल्ड बॉन्ड्स (SGB) और गोल्ड ETF भी निवेशकों को काफी लुभा रहे हैं।

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FD vs RD vs SIP vs SGB vs gold ETF: यहां समझें अंतर

एसेटजोखिमलिक्विडिटीटैक्सलॉक-इनउतार-चढ़ाव
FD/RDकमज्यादास्लैब रेट के अनुसारकोई नहींकम
इक्विटी SIPज्यादाज्यादा12.5% LTCGकोई नहींज्यादा
डेट फंडकमज्यादास्लैब रेट के अनुसारकोई नहींकम
SGBकमकमटैक्स फ्री8 सालकम
गोल्ड ETFमीडियमज्यादास्लैब रेट के अनुसारकोई नहींमीडियम

अगर आपकी जरूरतें शॉर्ट-टर्म हैं, तो लिक्विड डेट फंड या बैंक डिपॉजिट सबसे अच्छे विकल्प हैं। जब शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा हो, तो ये निवेश पोर्टफोलियो को स्थिरता देते हैं। वहीं, लंबे समय के लक्ष्यों के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) का टैक्स-फ्री होना एक बड़ा फायदा है। निवेशकों को अपनी जरूरत के हिसाब से लिक्विडिटी और बेहतर रिटर्न के बीच सही चुनाव करना चाहिए।

SGB, गोल्ड ETF और डेट फंड: 2026 के लिए क्या है आउटलुक?

एक्टिव इन्वेस्टर्स के लिए गोल्ड ETF बेहतरीन हैं क्योंकि इन्हें मार्केट में गिरावट के दौरान भी तुरंत बेचा जा सकता है। वहीं, जो लोग लंबे समय तक निवेश बनाए रखना चाहते हैं, उनके लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) ज्यादा फायदेमंद है। इसमें निवेश की गई शुरुआती रकम पर सालाना 2.5 प्रतिशत का अतिरिक्त ब्याज भी मिलता है।

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आज के समय में टैक्स की बचत भी एक बड़ा फैक्टर है। बैंक FD से होने वाली ब्याज की कमाई पर आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। इक्विटी SIP में लंबे समय के मुनाफे पर एक तय टैक्स देना होता है। लेकिन गोल्ड बॉन्ड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अगर आप इसे मैच्योरिटी तक रखते हैं, तो यह पूरी तरह टैक्स-फ्री रहता है।

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साल 2026 के नजरिए से देखें तो एक 'बैलेंस्ड पोर्टफोलियो' ही निवेश का सबसे सुरक्षित रास्ता नजर आता है। इमरजेंसी के लिए कुछ पैसा लिक्विड अकाउंट्स में रखना समझदारी है, जबकि मार्केट के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए सोना एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। अपने निवेश को अलग-अलग एसेट्स में बांटकर (Diversification) ही आप आर्थिक बदलावों के जोखिम से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।