रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद 10 अप्रैल को देशभर में सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जो खरीदारों के लिए एक राहत भरी खबर है। गोल्ड की कीमतों में आई यह नरमी उन लोगों के लिए अच्छा मौका है, जो सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) या गोल्ड ETF में निवेश की योजना बना रहे हैं। ग्लोबल मार्केट के संकेतों और रुपये की मजबूती के चलते मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर घरेलू रेट नीचे आए हैं। अब निवेशकों के मन में यह सवाल है कि क्या सोने में एंट्री करने का यह बिल्कुल सही समय है?

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कीमतों में करीब एक फीसदी की कमी आने के बाद ज्वेलरी शोरूम्स में ग्राहकों की चहल-पहल बढ़ गई है। मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में 24 कैरेट सोना MCX पर 72,000 रुपये के स्तर के आसपास ट्रेड कर रहा है। हालांकि पारंपरिक ज्वेलरी का क्रेज बरकरार है, लेकिन हालिया पॉलिसी बदलावों के बाद अब लोग डिजिटल गोल्ड की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। कीमतों में आए इस बदलाव से उन लोगों को बड़ी राहत मिली है, जो पिछली मार्केट रैली के दौरान खरीदारी करने से चूक गए थे।

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SGB बनाम ETF: अप्रैल 2026 के नए टैक्स नियमों के साथ तुलना

नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही गोल्ड एसेट्स पर टैक्स के नियम अब पहले से सख्त हो गए हैं। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और ETF से होने वाले मुनाफे का कैलकुलेशन अब एक नए फ्रेमवर्क के तहत किया जाएगा। ऐसे में बचत करने वालों के लिए जरूरी है कि वे निवेश का रास्ता चुनने से पहले लागत और टैक्स का गणित समझ लें। कई निवेशक अपने रिटर्न को बेहतर बनाने के लिए पुरानी बॉन्ड सीरीज से बाहर निकलने के लिए अप्रैल की स्पेसिफिक एग्जिट विंडो पर भी नजर रख रहे हैं।

फीचरसॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB)गोल्ड ETF
मिलने वाला ब्याज2.5 फीसदी सालानाकोई ब्याज नहीं मिलता
टैक्स का असर2026 के नए नियम लागू होंगेस्टैंडर्ड कैपिटल गेन्स टैक्स
लिक्विडिटी (पैसे निकालना)कम; निकलने के सीमित मौकेज्यादा; मार्केट ऑवर्स में कभी भी

कीमतें घटने के बाद गोल्ड इन्वेस्टर्स के लिए क्या है 'स्मार्ट मूव'?

SGB और ETF में से किसे चुना जाए, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितने समय के लिए निवेश करना चाहते हैं और आपको पैसों की जरूरत कब पड़ सकती है। SGB में आपको सालाना ब्याज का फायदा मिलता है, लेकिन इसका लॉक-इन पीरियड कुछ लोगों के लिए परेशानी बन सकता है। इसके उलट, ETF में आप कभी भी निवेश से बाहर निकल सकते हैं, हालांकि इसमें आपको मामूली सालाना एक्सपेंस रेशियो देना होता है। भारी-भरकम मेकिंग चार्ज वाली ज्वेलरी खरीदने के मुकाबले मौजूदा कीमतों पर ये दोनों ही विकल्प काफी बेहतर नजर आ रहे हैं।

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अगर आप लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर हैं, तो कीमतों में आई यह गिरावट खरीदारी शुरू करने का एक मजबूत संकेत है। मार्केट एक्सपर्ट्स की सलाह है कि बड़ा निवेश करने से पहले MCX पर सपोर्ट लेवल पर नजर जरूर रखें। खरीदारी का फाइनल फैसला लेने से पहले मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों के लोकल रेट्स जरूर चेक कर लें। नए टैक्स नियमों के हिसाब से अपने पोर्टफोलियो को सेट करने का यह सबसे सही समय है।