7 जून, 2026 को भारतीय शहरों में सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। इस तेजी ने रिटेल निवेशकों को अपनी निवेश रणनीति पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। अब सवाल यह है कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) और गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में से कौन सा विकल्प बेहतर है? इसके लिए टैक्स के गणित को बारीकी से समझना होगा। बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और भारी मेकिंग चार्ज की वजह से फिलहाल फिजिकल गोल्ड (सोना खरीदना) उतना आकर्षक नहीं लग रहा। अब वक्त है कि निवेशक पारंपरिक तरीके के बजाय रिटर्न और लिक्विडिटी पर ज्यादा ध्यान दें।

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भारत में लंबी अवधि के लिए वेल्थ क्रिएशन के मामले में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) आज भी पहली पसंद बना हुआ है। इसमें निवेशकों को सालाना 2.5 फीसदी का फिक्स्ड ब्याज मिलता है, जिसका भुगतान हर छह महीने में किया जाता है। अगर ग्लोबल मार्केट में सोने के दाम गिरते भी हैं, तो यह एक्स्ट्रा इनकम एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। सबसे बड़ी बात यह है कि अगर आप इसे मैच्योरिटी तक रखते हैं, तो कैपिटल गेन्स पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। टैक्स की यह छूट इसे डिजिटल गोल्ड के अन्य विकल्पों के मुकाबले कहीं ज्यादा फायदेमंद बनाती है।

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गोल्ड ETF या फिजिकल गोल्ड: आपके लिए क्या है सही?

शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग करने वालों के लिए गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) लिक्विडिटी के मामले में सबसे शानदार है। आप शेयर बाजार के ट्रेडिंग घंटों के दौरान कभी भी इन यूनिट्स को खरीद या बेच सकते हैं। फिजिकल गोल्ड के उलट, इसमें शुद्धता की कोई चिंता नहीं होती और न ही मेकिंग चार्ज या चोरी होने का डर रहता है। हालांकि, भारतीय परिवारों में फिजिकल गोल्ड का अपना एक अलग सांस्कृतिक महत्व है। शादियों के वक्त यह तुरंत काम आता है, लेकिन निवेश की एफिशिएंसी के मामले में यह डिजिटल एसेट्स के सामने टिक नहीं पाता।

खासियतसॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB)गोल्ड ETFफिक्स्ड डिपॉजिट (FD)
सालाना ब्याज2.5 फीसदीकुछ नहीं6.5 से 7.5 फीसदी
कैपिटल गेन्स टैक्समैच्योरिटी पर टैक्स फ्रीइनकम स्लैब के अनुसारइनकम स्लैब के अनुसार
लिक्विडिटी (पैसे निकालना)कम (5 साल का लॉक-इन)ज्यादा (तुरंत)मध्यम

सही गोल्ड एसेट का चुनाव पूरी तरह आपके फाइनेंशियल गोल्स पर निर्भर करता है। अगर आप रिटायरमेंट या बच्चों की पढ़ाई जैसे लॉन्ग-टर्म लक्ष्यों के लिए निवेश कर रहे हैं, तो SGB सबसे अच्छा है। वहीं, अगर आप बाजार की तेजी का फायदा उठाकर कभी भी बाहर निकलने की फ्लेक्सिबिलिटी चाहते हैं, तो ETF चुनें। फिजिकल गोल्ड को निवेश पोर्टफोलियो के बजाय निजी इस्तेमाल या गिफ्ट देने के लिए रखना ही बेहतर है। निवेश का सही समय तय करने के लिए सेंट्रल बैंक की ब्याज दरों पर नजर रखना आपके लिए फायदेमंद साबित होगा।