30 की उम्र पार करते ही ज्यादातर भारतीयों की कमाई अपने पीक पर होती है, लेकिन बचत के मामले में अक्सर हाथ तंग ही रहता है। इसकी बड़ी वजह है 'लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन', यानी सैलरी के साथ-साथ खर्चों का बेतहाशा बढ़ जाना। 40 की उम्र में होने वाली फाइनेंशियल टेंशन की जड़ें अक्सर इसी दौर की गलत आदतों में छिपी होती हैं। अगर आप मिड-एज में कर्ज के जाल से बचना चाहते हैं, तो आज की इच्छाओं और भविष्य की जरूरतों के बीच बैलेंस बनाना बहुत जरूरी है।

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इन्वेस्टमेंट शुरू करने में देरी करना आपकी सबसे महंगी भूल साबित हो सकती है। निवेश में महज 5 साल की देरी आपके रिटायरमेंट फंड को लाखों रुपये कम कर सकती है। 30 की उम्र 'पावर ऑफ कंपाउंडिंग' का फायदा उठाने का सबसे सही समय है। अपनी फाइनेंशियल फ्रीडम पक्की करने के लिए आज ही एक SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) शुरू करें।

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लाइफस्टाइल की होड़ और इंश्योरेंस की अनदेखी पड़ेगी भारी

जैसे ही इनकम बढ़ती है, कई लोग तुरंत लग्जरी कार या बड़े घर की ओर भागने लगते हैं। यह 'लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन' उस सरप्लस कैश को खा जाता है जो आपके रिटायरमेंट या इमरजेंसी फंड में जाना चाहिए था। इसके अलावा, सिर्फ ऑफिस के हेल्थ इंश्योरेंस के भरोसे रहना जोखिम भरा कदम है। अपने परिवार को भविष्य की अनिश्चितताओं से बचाने के लिए एक अलग टर्म प्लान जरूर लें।

क्रेडिट कार्ड का बेतहाशा इस्तेमाल अक्सर आपको भारी ब्याज वाले कर्ज के जाल में फंसा देता है। कई यंग प्रोफेशनल्स हर महीने सिर्फ 'मिनिमम ड्यू' चुकाने की गलती करते हैं, जिससे वे सालों तक कर्ज के चक्रव्यूह से बाहर नहीं निकल पाते। किसी भी लग्जरी चीज पर खर्च करने से पहले अपने महंगे कर्ज को खत्म करने को प्राथमिकता दें।

क्रेडिट कार्ड की लत और रिटायरमेंट की अनदेखी से बचें

निवेश की उम्रमंथली SIP राशि60 की उम्र में फंड
30 साल₹10,000₹3.53 करोड़
35 साल₹10,000₹1.89 करोड़

भारतीय मिडिल क्लास के लिए रिटायरमेंट की अनदेखी करना 'साइलेंट किलर' जैसा है। अक्सर माता-पिता बच्चों की पढ़ाई पर तो अपनी पूरी जमा-पूंजी लगा देते हैं, लेकिन अपने बुढ़ापे की जरूरतों को भूल जाते हैं। याद रखें, पढ़ाई के लिए लोन मिल सकता है, लेकिन रिटायरमेंट के लिए कोई बैंक लोन नहीं देता। आज ही एक समर्पित फंड बनाना शुरू करें ताकि भविष्य में आप किसी पर बोझ न बनें।

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30 की उम्र में कामयाबी के लिए अनुशासन और दौलत को देखने का नजरिया बदलना जरूरी है। दिखावे के लिए महंगी चीजें (Liabilities) खरीदने के बजाय ऐसी संपत्ति (Assets) बनाने पर ध्यान दें जो आपको लॉन्ग-टर्म स्टेबिलिटी दें। आज के समझदारी भरे फैसले ही आपके भविष्य को सुकून भरा बनाएंगे।