Festive Offers On Credit Cards: त्योहार आते ही बाजारों में छूट और ऑफर्स की भरमार दिखने लगती है। ऑनलाइन साइट्स से लेकर मॉल तक हर जगह "10% इंस्टेंट डिस्काउंट", "नो कॉस्ट EMI" और "कैशबैक डील्स" जैसे ऑफर्स दिखाई देते हैं। बैंक और क्रेडिट कार्ड कंपनियां भी इस मौके पर ग्राहकों को रिझाने के लिए अपनी स्कीमें लेकर आती हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये ऑफर्स असली बचत दिलाते हैं या खर्च बढ़ाने का एक तरीका बन जाते हैं?

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ऑफर्स में छिपी शर्तों की कहानी

अक्सर दिखने वाले बड़े डिस्काउंट के पीछे कई बार छोटी-छोटी शर्तें छुपी होती हैं। उदाहरण के तौर पर, किसी प्रोडक्ट पर 10% छूट तब ही मिलती है जब आप 15,000 रुपए से ज्यादा की खरीदारी करें। वहीं ज़्यादातर ऑफर्स में छूट की अधिकतम सीमा तय होती है, जैसे कि 1500 रुपए से ज्यादा का कैशबैक नहीं मिलेगा चाहे आप 50,000 रुपए खर्च करें।

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नो-कॉस्ट EMI का सच क्या है?

"नो-कॉस्ट EMI" शब्द सुनने में फ्री जैसा लगता है, लेकिन असलियत कुछ और होती है। कई बार इसमें छिपे प्रोसेसिंग चार्ज, GST और ब्याज पहले से जोड़ दिए जाते हैं। अगर आप लोन जल्दी चुकाते हैं तो 'फोरक्लोजर चार्ज' नाम का एक और खर्च सामने आता है, जो ग्राहक को नहीं बताया जाता।

सभी कार्ड धारकों के लिए नहीं होते ऑफर्स

कई ऑफर्स सिर्फ प्रीमियम कार्ड जैसे कि Visa Signature या MasterCard Select के लिए होते हैं। आम ग्राहक के पास अगर सामान्य क्रेडिट कार्ड है, तो वो उन ऑफर्स का फायदा नहीं उठा पाता, भले ही उसका खर्च बराबर क्यों न हो।

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कैशबैक में देरी, चार्जेज में तेजी

जहां कैशबैक आने में हफ्तों से लेकर 2-3 महीने तक का समय लग सकता है, वहीं क्रेडिट कार्ड की लेट फीस, ओवरलिमिट चार्ज और सर्विस चार्ज तुरंत बिल में जुड़ जाते हैं। नतीजतन आपकी जेब पर पड़ता है ज़्यादा बोझ।

बचत का असली तरीका क्या है?

अगर आप हर ऑफर की शर्तों को ध्यान से पढ़ते हैं, बिना जरूरत के खर्च नहीं करते और समय पर बिल चुकाते हैं, तो वाकई ये ऑफर्स आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। लेकिन बिना जांचे-परखे सिर्फ छूट के चक्कर में खरीदारी करना आपको नुकसान में डाल सकता है।

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समझदारी ही असली छूट है

क्रेडिट कार्ड का सही इस्तेमाल तभी होता है जब आप जानकार ग्राहक की तरह सोचें। ऑफर्स का फायदा तभी लें जब वे आपके लिए सच में ज़रूरी और किफायती हों। वरना त्योहारी सीजन में मिलने वाली ये छूट, आपको धीरे-धीरे कर्ज के बोझ में भी डाल सकती है।