बुधवार देर रात (भारतीय समयानुसार) आए अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले का असर दुनिया भर के यील्ड्स पर साफ दिख रहा है। 16 जून की स्थिति के मुताबिक, भारतीय निवेशकों के सामने अब फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और डेट इंस्ट्रूमेंट्स के बीच सही चुनाव करने की चुनौती है। अमेरिकी पॉलिसी में होने वाले इन बदलावों का सीधा असर अक्सर भारतीय रुपये और बॉन्ड यील्ड पर पड़ता है। ऐसे में, निवेश की अवधि (Investment Horizon) तय करना ही आज के समय में सही एसेट क्लास चुनने का सबसे अच्छा तरीका है।

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अगर आप सिर्फ तीन महीने के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो सेविंग्स अकाउंट या लिक्विड फंड्स सबसे बेहतर हैं। इनमें रिस्क बहुत कम होता है और जरूरत पड़ने पर पैसा निकालना भी आसान है। वहीं, एक साल की अवधि के लिए अल्ट्रा-शॉर्ट ड्यूरेशन फंड्स या शॉर्ट-टर्म FD पर विचार किया जा सकता है। यह रणनीति आपको सेविंग्स अकाउंट से बेहतर रिटर्न देने के साथ-साथ नकदी की जरूरत को भी पूरा करती है।

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भारतीय निवेशकों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट और डेट फंड्स की तुलना

दो साल के निवेश के लिए AAA रेटेड बॉन्ड्स वाले टारगेट-मैच्योरिटी फंड्स एक शानदार विकल्प हैं। ये फंड्स मौजूदा यील्ड को लॉक कर देते हैं और निवेशकों को ज्यादा पारदर्शिता देते हैं। जो लोग लंबी अवधि में बड़ा मुनाफा चाहते हैं, वे गिल्ट फंड्स (Gilt Funds) का रुख कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए आपको नेट एसेट वैल्यू (NAV) में होने वाले उतार-चढ़ाव को झेलने के लिए तैयार रहना होगा।

निवेश का प्रकारसही समय सीमासामान्य जोखिम
फिक्स्ड डिपॉजिट1 से 5 साललिक्विडिटी का जोखिम
लिक्विड फंड्स0 से 3 महीनेरी-इन्वेस्टमेंट का जोखिम
गिल्ट फंड्स5 साल से ज्यादाड्यूरेशन का जोखिम

साल 2023 से भारत में FD और डेट फंड्स, दोनों पर टैक्स के नियम एक जैसे हो गए हैं। अब इनसे होने वाली कमाई आपकी कुल इनकम में जुड़ती है और आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से ही टैक्स लगता है। टैक्स के अलावा, अपने डेट फंड पोर्टफोलियो की क्रेडिट क्वालिटी जरूर चेक करें। अचानक होने वाले नुकसान से बचने के लिए कम रेटिंग वाले पेपर्स में निवेश करने वाले फंड्स से दूर रहना ही बेहतर है।

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फेड के फैसले के बाद कैसे मैनेज करें अपना FD और गिल्ट पोर्टफोलियो?

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के भविष्य के संकेतों और ब्याज दरों के रुख को समझने के बाद ही अपने निवेश में कोई बड़ा बदलाव करें। लिक्विडिटी और ब्याज दरों में बदलाव को मैनेज करने के लिए 'लैडर्ड FD' (Laddered FD) का तरीका अपनाएं। अपने पोर्टफोलियो को समय-समय पर रीबैलेंस करते रहें ताकि आपका निवेश आपके रिस्क प्रोफाइल के मुताबिक बना रहे। अनुशासन के साथ अपनाई गई यह रणनीति ग्लोबल मार्केट के उतार-चढ़ाव के बीच भी आपकी पूंजी को सुरक्षित रखेगी।