Credit Card: आज के समय में क्रेडिट कार्ड सिर्फ एक भुगतान का जरिया नहीं रह गया है, बल्कि यह बैंकों और ग्राहकों दोनों के लिए एक बड़ा सिस्टम बन चुका है। मॉल, एयरपोर्ट, ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट या फिर फोन कॉल हर जगह बैंक क्रेडिट कार्ड के लिए लोगों को ऑफर देते नजर आते हैं। सवाल यह है कि आखिर बैंक क्रेडिट कार्ड देने के लिए इतने उत्सुक क्यों रहते हैं और इससे उन्हें क्या फायदा होता है?

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क्रेडिट कार्ड की बढ़ती लोकप्रियता

भारत में बीते कुछ सालों में क्रेडिट कार्ड यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ी है। ऑनलाइन शॉपिंग, कैशलेस पेमेंट और आसान EMI विकल्पों ने लोगों को क्रेडिट कार्ड की ओर आकर्षित किया है। ग्राहक को सुविधा मिलती है कि वह अभी खरीदारी करे और भुगतान बाद में करे। यही आदत बैंकों के लिए कमाई का बड़ा जरिया बन जाती है।

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बैंक कैसे कमाते हैं पैसा

क्रेडिट कार्ड से बैंकों की कमाई कई तरीकों से होती है। सबसे बड़ा सोर्स है ब्याज यानी इंटरेस्ट। अगर कोई ग्राहक समय पर पूरा बिल नहीं चुकाता, तो बची हुई रकम पर भारी ब्याज लगता है। यह ब्याज कई बार सालाना 30-40 फीसदी तक पहुंच जाता है।

मर्चेंट फीस से कमाई

जब आप किसी दुकान या वेबसाइट पर क्रेडिट कार्ड से भुगतान करते हैं, तो बैंक उस दुकानदार से एक छोटी फीस वसूलता है। इसे मर्चेंट फीस कहा जाता है। ग्राहक को यह नजर नहीं आती, लेकिन हर ट्रांजैक्शन से बैंक को फायदा होता है।

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अलग-अलग चार्ज भी बनते हैं कमाई का जरिया

क्रेडिट कार्ड पर सिर्फ ब्याज ही नहीं, बल्कि कई तरह के चार्ज भी लगाए जाते हैं। जैसे सालाना कार्ड फीस, लेट पेमेंट चार्ज, कैश निकालने पर फीस, EMI बनाने का चार्ज, लिमिट बढ़ाने से जुड़ी फीस इन सभी से बैंक की कमाई धीरे-धीरे बढ़ती रहती है।

ऑफर और रिवॉर्ड के पीछे की रणनीति

कैशबैक, रिवॉर्ड पॉइंट और डिस्काउंट दिखने में भले ही ग्राहकों के फायदे जैसे लगें, लेकिन ये बैंक की मार्केटिंग रणनीति का हिस्सा होते हैं। इससे ग्राहक ज्यादा खर्च करता है, ज्यादा ट्रांजैक्शन करता है और बैंक की कमाई भी बढ़ती है।

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ग्राहक को क्या समझदारी रखनी चाहिए

क्रेडिट कार्ड फायदेमंद तभी है, जब उसका सही इस्तेमाल किया जाए। समय पर पूरा बिल चुकाना, अनावश्यक खर्च से बचना और चार्ज की जानकारी रखना बेहद जरूरी है। तभी आप ऑफर का फायदा उठा पाएंगे और ब्याज के जाल में नहीं फंसेंगे।

क्रेडिट कार्ड बैंकों के लिए एक मजबूत कमाई का जरिया है। वहीं ग्राहक के लिए यह सुविधा और जिम्मेदारी दोनों है। अगर समझदारी से इस्तेमाल किया जाए, तो क्रेडिट कार्ड फायदे का सौदा बन सकता है, वरना यह कर्ज का बोझ भी बन सकता है।