नयी दिल्ली। पीएफ खाताधारकों को निवेश राशि पर मिलने वाले ब्याज के मामले नुकसान हो सकता है। दरअसल कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ ब्याज दर में कटौती पर विचार कर रही है। मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईपीएफओ ब्याज दरों में 15 से 25 आधार अंकों की कटौती कर सकता है, जिससे सैलेरी पाने वाले लोगों को पीएफ अकाउंट में निवेश पर कम ब्याज मिलेगा। जानकारी के लिए बता दें कि 2018-19 में रिटायरमेंट फंड प्रबंधक ने वित्त मंत्रालय के साथ सात महीने की चर्चा के बाद अपने सब्सक्राइबर्स के लिए 8.65 फीसदी की ब्याज दर निर्धारित की थी। ईपीएफओ के अपने निवेश अधिकारियों, कार्यकारी समिति के सदस्यों और केंद्रीय ट्रस्टी बोर्ड के साथ बैठकों के बाद जनवरी के आखिर तक ब्याज दर की घोषणा करने की उम्मीद है। तो यदि आपका भी पीएफ खाता है तो निवेश पर मिलने वाले ब्याज पर आपको भी नुकसान होगा।

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क्या है ब्याज दर में कटौती की वजह

ईपीएफ की वार्षिक ब्याज दर में संभावित कटौती के पीछे मुख्य कारण आर्थिक मंदी को माना जा रहा है। इसके अलावा डेब्ट मार्केट इंस्ट्रुमेंट पर कम यील्ड और पब्लिक प्रोविडेंट फंड जैसी योजनाओं पर कम ब्याज दर भी इसके कारणों में शामिल है। मिंट ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि ईपीएफओ चालू वित्त वर्ष के लिए ब्याज दर की गणना करते समय इन चीजों को ध्यान में रखेगा।

सरकारी सिक्योरिटीज में आयी गिरावट

एक अधिकारी के मुताबिक इस साल में आर्थिक मंदी दिखाई दी है। डेब्ट इंस्ट्रुमेंट पर गिरते रिटर्न से ईपीएफओ 2019-20 के लिए ब्याज दर घटाने को मजबूर होगा। 10-वर्षीय बेंचमार्क सरकारी सिक्योरिटीज में जनवरी 2019 से जनवरी 2020 के बीच 85 से 90 आधार अंकों की गिरावट आयी है, जिससे ईपीएफओ की कमाई प्रभावित होगी। अधिकारी का मानना है कि ब्याज दर में 15-25 आधार अंकों की कटौती पर कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

क्या होता है पीएफ

किसी कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए पीएफ योजना बेहद लाभदायक होती है। इससे वे न केवल हर महीने अपनी सैलेरी में से कुछ बचत कर सकते हैं, बल्कि इसमें जमा राशि पर आपको ब्याज दर और टैक्स में छूट जैसे दूसरे फायदे भी मिलते हैं। आम तौर पर पीएफ अमाउंट रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने के समय दिया जाता है, मगर यदि आप चाहें तो जरूरत के वक्त पीएफ में से पैसे निकलवा सकते हैं। हालांकि इसके लिए कुछ शर्तें होती हैं।

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