देश के बड़े शहरों में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए एक अच्छी खबर सामने आ सकती है। बढ़ते घर किराए को देखते हुए सरकार हाउस रेंट अलाउंस (HRA) से जुड़े नियमों में बदलाव पर विचार कर रही है। ड्राफ्ट इनकम टैक्स नियम 2026 में यह सुझाव दिया गया है कि कुछ नए शहरों को ज्यादा HRA छूट की सूची में शामिल किया जाए।

Advertisement

तेजी से बढ़ते शहरों पर सरकार की नजर

पिछले कुछ वर्षों में बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों में रहने का खर्च काफी बढ़ गया है। इन शहरों में आईटी कंपनियों, स्टार्टअप्स और सर्विस सेक्टर के फैलाव से लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसका सीधा असर घरों के किराए पर पड़ा है, जो अब कई मामलों में पुराने मेट्रो शहरों जितना हो गया है।

Advertisement

HRA छूट की सीमा बढ़ने का प्रस्ताव

मौजूदा नियमों के अनुसार, मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई जैसे मेट्रो शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को सैलरी का 50 प्रतिशत तक HRA टैक्स फ्री मिलता है। बाकी शहरों में यह सीमा 40 प्रतिशत है। नए प्रस्ताव में बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी 50 प्रतिशत छूट वाले शहरों में जोड़ने की बात कही गई है।

Advertisement

नौकरीपेशा लोगों को क्या मिलेगा फायदा

अगर यह बदलाव लागू होता है, तो इन शहरों में काम करने वाले कर्मचारियों को हर साल हजारों रुपये की टैक्स बचत हो सकती है। खासतौर पर वे लोग जो किराए के मकान में रहते हैं और जिनकी सैलरी का बड़ा हिस्सा घर किराए में चला जाता है, उन्हें इससे बड़ी राहत मिलेगी।

कुछ शहरों को अभी इंतजार

दिलचस्प बात यह है कि नोएडा और गुरुग्राम जैसे बड़े रोजगार केंद्र इस प्रस्तावित सूची में शामिल नहीं हैं। ऐसे में वहां काम करने वाले कर्मचारियों के लिए HRA की सीमा फिलहाल 40 प्रतिशत ही रहेगी।

Advertisement

सिर्फ ओल्ड टैक्स सिस्टम वालों को राहत

यह प्रस्ताव केवल उन कर्मचारियों के लिए है जो ओल्ड टैक्स रिजीम चुनते हैं। नए टैक्स सिस्टम में टैक्स दरें कम हैं, लेकिन HRA जैसी छूट नहीं मिलती। इसलिए कर्मचारियों को अपनी सैलरी और खर्च देखकर सही टैक्स सिस्टम चुनना जरूरी होगा।

अंतिम फैसला बाकी

फिलहाल यह एक ड्राफ्ट नियम है। सरकार इस पर सुझाव और आपत्तियां लेने के बाद ही अंतिम फैसला करेगी। अगर यह नियम लागू होता है, तो महंगे शहरों में रहने वाले नौकरीपेशा लोगों के लिए यह एक बड़ी राहत साबित हो सकती है।