नयी दिल्ली। जब पैसा बनाने की बात आती है तो ऐसा कोई जादुई फॉर्मूला नहीं है जिससे ऐसा किया जा सके। लेकिन बचत, निवेश और बीमा द्वारा प्रदान की गई सुरक्षा के सहारे आप पैसा बना (Wealth Creation) सकते हैं। अपनी मेहनत से कमाए गए पैसे को कई गुना बढ़ाने के लिए आपको उन फाइनेंशियल उपकरणों का चयन करना होगा जो लंबे समय में महंगाई की मार झेलते हैं। एक बार आप इनकम, रिस्क लेने की क्षमता और आयु के आधार पर निवेश इंस्ट्रूमेंट्स को पहचान लें तो आराम से बढ़िया रिटर्न हासिल कर सकते हैं। मगर ध्यान रहे कि पैसा रातोंरात नहीं बनता। इसके लिए समय लगेगा और आपको कुछ टिप्स की जरूरत होगी, जिनमें से 5 हम आपको यहां बताने जा रहे हैं।
समय ही धन है। इसलिए आपको इसे बर्बाद नहीं करना चाहिए और जैसे ही आप कमाई करना शुरू करते हैं, वेल्थ क्रिएशन पर काम करना शुरू कर देना चाहिए। जल्दी शुरू करने से आप ज्यादा पैसा जमा कर सकेंगे, जिस पर आपको रिटर्न भी बढ़िया मिलेगा। अगर कोई 22 वर्षीय व्यक्ति पीपीएप में सालाना 50,000 रुपये का निवेश करना शुरू करता है तो वह 2035 में 37 वर्षीय हो जाने पर 13.56 लाख रुपये का फंड जमा कर लेगा। यहां 15 साल की अवधि में 7.1% फीसदी ब्याज दर ही मानी गई है। यदि आप निवेश राशि बढ़ायें या ब्याज दर बढ़ती है तो और भी बढ़ा फंड तैयार होगा।
यदि आप फ्लेक्सिबिलिटी और हाई रिटर्न की तलाश में हैं तो म्यूचुअल फंड एक बेहतरीन निवेश विकल्प हैं। अपने निवेश प्रदर्शन को बेहतर बनाने और वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए म्यूचुअल फंड में समय के साथ निवेश बढ़ाएं। मान लें कि आपकी इनकम एक वर्ष में 10 फीसदी बढ़ जाती है, तो आपको अपनी एसआईपी में 10 फीसदी की वृद्धि करनी चाहिए। सालाना अपने निवेश को बढ़ाने से आप वित्तीय लक्ष्य जल्दी हासिल कर सकेंगे।
जोखिम से बचने वाले निवेशक, जैसे वो लोग जो रिटायरमेंट के करीब हैं, गारंटीड रिटर्न के लिए एफडी में निवेश करना पसंद करते हैं। हालांकि इस समय एफडी रेट मुद्रास्फीति दर (महंगाई) से कम हैं, जिससे निवेश पूंजी में गिरावट आएगी। इससे बचने के लिए आप एक निवेश रणनीति तैयार कर सकते हैं, जिसे एफडी लैडरिंग तकनीक कहा जाता है। इस तकनीक के तहत अपने सारा पैसा एक एफडी में निवेश करने के बजाय अलग-अलग अवधियों के लिए कई एफडी में लगाते हैं। इससे होगा ये कि हर एफडी कुछ-कुछ समय में मैच्योर होगी और आपको सही जगह पैसा लगाने का मौका मिलता रहेगा।
आप कितना जोखिम ले सकते हैं ये अलग चीज है। आप कितना जोखिम नुकसान की शक्ल में उठा सकते हैं आपको इस पर ध्यान देना चाहिए। ये दोनों चीजें क्रमश: जोखिम सहनशीलता और जोखिम भूख है। आपकी इनकम, खर्च, बचत, लोन चुकाने का रिकॉर्ड, लायबिलिटीज, मौजूदा निवेश, बीमा सुरक्षा, आदि जैसी चीजें आपकी जोखिम सहनशीलता को परिभाषित करती हैं। आपको इसी को ध्यान में रख कर निवेश करना है।
लोन लेते समय चालाकी से काम लें ताकि आप उसे आराम से चुका सकें। लोन लेने के लिए बेस्ट लोन ऑफ़र, रिचर्स, अनावश्यक उधार लेने या अधिक उधार लेने से बचना, क्रेडिट कार्ड के खर्चों को नियंत्रण में रखना, मासिक ईएमआई के ऑटो-डेबिट जैसी चीजों पर ध्यान दें। साथ ही प्री-पेमेंट भी एक बढ़िया तरीका है।
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