नयी दिल्ली। इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइलिंग एक जिम्मेदारी है जिसे प्रत्येक व्यक्ति को पूरा करना चाहिए। जब सब कुछ डिजिटल हो रहा है तो ऐसे में करदाताओं को भी सलाह दी जाती है कि वे अपने आईटीआर की ई-फाइलिंग करें और वो भी अपने दम पर। ताकि आपको बेवजह का सर्विस चार्ज न देना पड़े। हालांकि करदाताओं को आईटीआर फॉर्म का चयन के बारे में कुछ आइडिया होना चाहिए, जो जरूरी भी है। आम तौर पर आईटीआर दाखिल करते समय कुछ सामान्य गलतियां होती हैं, जिनसे हर करदाता को हर हाल में बचना चाहिए। सबसे पहली और जरूरी बात यह है कि आपको समय पर आईटीआर दाखिल करना चाहिए। इसके अलावा आईटीआर फॉर्म का चयन, आय के स्रोत का खुलासा न करना आदि वे बड़ी गलतियां हैं जो आपको नुकसान करवा कर सकती हैं। आइये जानते हैं ऐसी 5 बड़ी गलतियों के बार में जिनसे आपको आईटीआर भरते समय बचना चाहिए।
अगर आप एक करदाता हैं तो आपको इस पर ध्यान देने की जरूरत है। हर साल आयकर विभाग संशोधित आईटीआर फॉर्म जारी करता है जिन पर पात्रता मानदंड होते हैं। प्रत्येक आईटीआर फॉर्म इनकम की प्रकृति के आधार पर अलग होता है जिसका निर्धारिती (Assessee) द्वारा खुलासा किया जाना चाहिए। फॉर्म में हर साल संशोधन होता है। इसलिए ऐसा हो सकता है कि किए गए बदलावों के आधार पर आपको को अब वही आईटीआर दाखिल नहीं करना होगा जो आपने पिछले साल दाखिल किया था।
यह एक ऐसी गलती है जो कई वेतनभोगी व्यक्ति करते हैं। उन्हें रिटर्न दाखिल करते समय वेतन के अलावा आय के सभी स्रोतों का खुलासा करना होगा। आपके वेतन के अलावा अन्य स्रोतों में बैंक बचत से आय, घर की संपत्ति से किराये की आय (यदि कोई हो), पूंजीगत लाभ आय, आदि शामिल हैं।
अपने सभी टीडीएस प्रमाणपत्र जैसे फॉर्म 16, बैंक से ब्याज प्रमाणपत्र (फॉर्म 16 ए), संपत्ति की बिक्री पर टीडीएस प्रमाणपत्र (फॉर्म 16 बी) को एक साथ रखने की सलाह दी जाती है। यह जांचना भी उचित है कि आपके फॉर्म 26एएस में एंट्रीज के साथ क्या आपके पैन पर सही टीडीएस काट लिया गया है। फॉर्म 26एएस एक कंसोलिडेटेड टैक्स स्टेटमेंट है जो सभी स्रोतों से आपके पैन पर घटाए गए टीडीएस को दर्शाता है। आप सुनिश्चित करें कि मूल्यों में कोई गड़बड़ी न हो। अगर है तो आपको कटौतीकर्ता को तुरंत सूचित करना होगा। इस संबंध में किसी गड़बड़ी से बाद में आप टीडीएस पर टैक्स क्रेडिट का दावा नहीं कर सकेंगे।
ऐसा हो सकता है कि आप एम्प्लोयर को कर बचत निवेश प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाए हों और इसलिए ये डिटेल आपके फॉर्म 16 में दर्ज नहीं की गई। हालाँकि भले ही एम्प्लोयर को निवेश की जानकारी नहीं दी गई, फिर भी आईटीआर दाखिल करते समय टैक्स रिलीफ का क्लेम किया जा सकता है। सहायक दस्तावेजों के रूप में निवेश का विवरण रखें ताकि इस कटौती का क्लेम किया जा सके।
इनकम टैक्स फाइलिंग को बिल्कुल अंतिम समय में न करें। बल्कि आवश्यक दस्तावेज और टीडीएस फॉर्म पहले से अच्छी तरह से एकत्र करें और अंतिम से समय कुछ पहले आईटीआर दाखिल करें। देर से दाखिल करने पर आपको जुर्माना देना होगा। आपको कुछ बेनेफिट से भी हाथ धोना पड़ सकता है।
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