भारत में साइबर फ्रॉड के मामले जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, वो वाकई डराने वाला है। अक्सर लोग अकाउंट से पैसे कटते ही उम्मीद छोड़ देते हैं, लेकिन अगर आप तुरंत एक्शन लें तो डूबा हुआ पैसा वापस मिल सकता है। इसके लिए 'गोल्डन ऑवर' यानी फ्रॉड होने के शुरुआती दो घंटे सबसे अहम होते हैं। ऐसे में बिना देर किए नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना आपकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

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आपका पैसा वापस मिलेगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि कितनी जल्दी उस ट्रांजैक्शन को ब्लॉक किया गया है। बैंक और जांच एजेंसियां मिलकर संदिग्ध अकाउंट्स को फ्रीज कर देती हैं। अगर आप समय रहते शिकायत कर देते हैं, तो पैसा बैंक सिस्टम से बाहर नहीं जा पाता और उसे आपके अकाउंट में वापस लाना आसान हो जाता है। इससे जालसाज एटीएम से पैसे नहीं निकाल पाते। अपनी जमापूंजी बचाने के लिए किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत प्रतिक्रिया देना जरूरी है।

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आधिकारिक चैनलों के जरिए ऐसे दर्ज कराएं साइबर फ्रॉड की शिकायत

शिकायत दर्ज कराने के लिए आप नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल की मदद ले सकते हैं। यहां आपको ट्रांजैक्शन की सही जानकारी और फ्रॉड से जुड़े सबूत देने होंगे। चैट के स्क्रीनशॉट या पेमेंट अलर्ट जैसे प्रूफ जांच में काफी मददगार साबित होते हैं। इस डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए टेक्निकल टीमें पैसों के ट्रेल (Money Trail) को ट्रैक करती हैं। शिकायत के बाद मिलने वाले रेफरेंस नंबर को संभाल कर रखें, क्योंकि बैंक में फॉलो-अप के लिए इसकी जरूरत पड़ती है। रिपोर्ट सबमिट करने से पहले सभी अकाउंट नंबरों की दोबारा जांच जरूर कर लें।

रिपोर्टिंग का समयरिकवरी की संभावनानुकसान का जोखिम (लायबिलिटी)
शुरुआती 2 घंटेसबसे ज्यादाजीरो लायबिलिटी
3 दिनों के भीतरमध्यम से ज्यादासीमित लायबिलिटी
7 दिनों के बादबहुत कमभारी नुकसान का जोखिम

बैंक के नियमों का फायदा उठाकर सुरक्षित पाएं अपना पैसा

डिजिटल ट्रांजैक्शन को सुरक्षित बनाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने ग्राहकों को एक मजबूत सुरक्षा कवच दिया है। अगर आप किसी भी गलत ट्रांजैक्शन की जानकारी 3 दिनों के भीतर बैंक को दे देते हैं, तो आपकी लायबिलिटी जीरो हो जाती है, यानी आपका कोई नुकसान नहीं होगा। इसके बाद बैंक मामले की गहराई से जांच करता है। हालांकि, अगर आप 7 दिनों से ज्यादा की देरी करते हैं, तो पूरा पैसा वापस मिलने की उम्मीद काफी कम हो जाती है। अपने बैंक को अपडेट रखना ही फंड बचाने का सबसे कारगर तरीका है।

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साइबर ठगी का शिकार होने पर घबराने के बजाय सूझबूझ और जागरूकता से काम लेना जरूरी है। अपने फोन में 1930 हेल्पलाइन नंबर को इमरजेंसी के लिए अभी सेव कर लें। याद रखें, कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी (OTP) शेयर न करें, चाहे वो खुद को अधिकारी ही क्यों न बताए। अगर आपके साथ कोई फ्रॉड होता है, तो तुरंत कानूनी प्रक्रिया का पालन करें। आपकी सतर्कता ही वित्तीय अपराधों के खिलाफ आपका सबसे बड़ा हथियार है।