Petrol Diesel Prices: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीद के बीच कच्चे तेल की कीमतों में हालिया ऊंचाई से भारी गिरावट आई है। इस बीत भारतीय उपभोक्ताओं के बीच एक ही सवाल है आखिर पेट्रोल-डीजल की कीमतें कब कम होंगी। ऐसे में आपको जान लेना चाहिए कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई खास राहत देखने के लिए कई हफ्ते या महीने भी इंतजार करना पड़ सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि ईरान के साथ शांति समझौता पूरा हो गया है और कहा कि शुक्रवार, 19 जून को समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) फिर से खुल जाएगा।
समझौते की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड इस हफ्ते पहली बार मार्च की शुरुआत के बाद 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया, जबकि कुछ हफ्ते पहले ही पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़ी आपूर्ति में रुकावट के कारण यह 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया था। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की शिपमेंट में रुकावट की चिंता कम होने के कारण पिछले पांच ट्रेडिंग सत्रों में ब्रेंट की कीमतों में लगभग 15% और पिछले महीने में 27% से अधिक की गिरावट आई है।
हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट का असर तुरंत भारत में ईंधन की खुदरा कीमतों में कमी के रूप में नहीं दिख सकता है क्योंकि सरकारी ईंधन खुदरा विक्रेताओं ने पहले ही काफी ऊंची कीमतों पर कच्चा तेल और रिफाइंड उत्पाद खरीदे थे।
फ्यूल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं?
पेट्रोल और डीजल की कीमतें आखिरी बार 25 मई को बढ़ाई गई थीं, जो दो हफ्ते से भी कम समय में चौथी बढ़ोतरी थी, क्योंकि तेल विपणन कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर ग्राहकों पर डाला था। दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें 2.61 रुपये प्रति लीटर बढ़कर 102.12 रुपये हो गईं, जबकि डीजल की कीमतें 2.71 रुपये बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गईं। 15 मई से ईंधन की कीमतों में कुल बढ़ोतरी 7.5 रुपये प्रति लीटर से अधिक हो गई है।
पेट्रोल और डीजल की कीमत कब कम होगी?
क्रिसिल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर सेहुल भट्ट ने कहा, "पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेतों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के फिर से खुलने की संभावना से एनर्जी मार्केट में जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम में भारी गिरावट आई है।"भट्ट ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, साथ ही घरेलू ईंधन की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी और एक्साइज ड्यूटी में कटौती ने ऑटोमोबाइल ईंधन पर होने वाले नुकसान (अंडर-रिकवरी) की काफी हद तक भरपाई कर दी है, जिससे पेट्रोल और डीजल के मार्केटिंग मार्जिन पर दबाव कम हुआ है।
उन्होंने कहा, "मार्च-मई 2026 के दौरान पेट्रोल, डीजल और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) पर कुल अंडर-रिकवरी का अनुमान लगभग 1 लाख करोड़ रुपये है। अगर भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहती है, तो मौजूदा स्तर से अंडर-रिकवरी में कोई खास बढ़ोतरी होने की संभावना नहीं है।" भट्ट ने आगे कहा कि कच्चे तेल की कम कीमतें महंगाई के दबाव को कम करने और भारत के एनर्जी इम्पोर्ट बिल को घटाने में भी मदद करेंगी।
हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि एनर्जी मार्केट को पूरी तरह से स्थिर होने में समय लग सकता है। भट्ट ने कहा, "हालांकि लंबे समय तक सप्लाई में रुकावट का खतरा कम हो गया है, लेकिन कच्चे तेल और LNG मार्केट को पूरी तरह से सामान्य होने में कई हफ्ते या महीने लग सकते हैं। निकट भविष्य में, शांति समझौते को लागू करने को लेकर अनिश्चितताएं एनर्जी मार्केट में उतार-चढ़ाव का कारण बनी रह सकती हैं।"
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