नयी दिल्ली। आरबीआई द्वारा रेपो रेट में 115 आधार अंकों की कटौती के बाद बैंक की एफडी दरें घटती जा रही हैं। आज ही आईसीआईसीआई बैंक ने भी एफडी रेट्स में कटौती की है। मगर इस दौरान कॉर्पोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की मांग बढ़ गई है। कॉर्पोरेट एफडी में ज्यादा ब्याज मिलता है। मगर ये हर किसी निवेशक के लिए बेहतर ऑप्शन नहीं है। क्योंकि कॉर्पोरेट एफडी में कुछ जोखिम भी होता है। इसके अलावा ध्यान देने वाली बात ये है कि सभी कॉर्पोरेट एफडी निवेश के बेहतर ऑप्शन नहीं हैं, क्योंकि आपको नुकसान भी हो सकता है। यहां हम ऐसे ही पांच फैक्टर्स के बारे में बताएंगे जिन पर किसी निवेशक को कॉर्पोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने से पहले विचार करना चाहिए।
कॉर्पोरेट एफडी बैंक एफडी की तुलना में जोखिमपूर्ण होती हैं क्योंकि इन एफडी में डिफ़ॉल्ट जोखिम ज्यादा होता है। एक्सपर्ट्स भी उन कॉर्पोरेट एफडी में पैसा लगाने के लिए कहते हैं जिनकी क्रेडिट रेटिंग बेहतर हो। मगर बेहतर क्रेडिट रेटिंग वाली कॉर्पोरेट एफडी में आपको थोड़ा रिटर्न कम मिल सकता है, लेकिन आपका पैसा सुरक्षित रहेगा। हाई क्रेडिट किसी कंपनी के बेहतर वित्तीय स्वास्थ्य और डिफ़ॉल्ट की कम संभावना का संकेत देता है।
आपको कंपनी डिपॉजिट का विकल्प तभी चुनना चाहिए जब समान अवधि में कॉर्पोरेट एफडी और बैंक एफडी के बीच ब्याज दर का अंतर कम से कम 250 आधार अंक यानी 2.5 फीसदी हो। वरना एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अतिरिक्त जोखिम लेने का कोई फायदी नहीं है।
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि 1-3 साल की छोटी अवधि के लिए कॉर्पोरेट एफडी में पैसा लगाना ठीक है। लंबा कार्यकाल होने पर डिफ़ॉल्ट का जोखिम बढ़ जाता है। असल में अर्थव्यवस्था में परिवर्तन से कंपनी पर भी प्रभावित पड़ता है और लंबी अवधि में इसकी संभावना ज्यादा हो जाती है। इसके अलावा चक्रीय कंपनियों (Cyclical Companies) के लिए, बिजनेस साइकिल में बदलाव से किसी कंपनी की रीपेमेंट क्षमता प्रभावित हो सकती है।
फाइनेंशियल प्लैनर्स के अनुसार निवेशकों को उन कंपनियों की फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करना चाहिए जिनके पास एक हाई कॉर्पोरेट गवर्नेंस स्टैंडर्ड हो। यानी उस कंपनी को चलाने वाला मैनेजमेंट बेहतर हो। साथ ही जब आप कॉर्पोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करें तो आपके पास कंपनी के डेवलपमेंट, उसकी इनकम और शेयरधारकों के बीच कंपनी को लेकर क्या नजरिया इस पर नजर रखनी चाहिए। एक बार जब कंपनी दिवालिया हो जाती है तो फिक्स्ड डिपॉजिटर्स के पैसे लौटाना लिक्विडेशन के दौरान पहली प्राथमिकता नहीं होगी और आप अपनी मूल राशि खो सकते हैं।
अंत में वरिष्ठ नागरिकों के लिए कॉरपोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट का ऑप्शन चुनना उचित नहीं है क्योंकि बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट से 50,000 रुपये तक की ब्याज आय टैक्स-फ्री होती है। मगर कॉर्पोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाला इतने ही ब्याज पर वरिष्ठ नागरिकों को टैक्स देना होता है।
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