देश में कारोबार को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार नियमों को आसान बनाने पर काम कर रही है। अब खबर है कि कॉरपोरेट फाइलिंग सिस्टम में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। इसका सीधा फायदा कंपनियों और LLP फर्म्स को मिल सकता है, जिन्हें हर साल कई तरह की रिपोर्ट और दस्तावेज जमा करने होते हैं।

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यह सुधार खास तौर पर Registrar of Companies (RoC) के तहत होने वाली फाइलिंग प्रक्रिया से जुड़ा होगा। सरकार का उद्देश्य है कि नियम आसान हों और प्रक्रिया ज्यादा समय लेने वाली न रहे।

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MCA पोर्टल पर फॉर्म होंगे छोटे

अभी कंपनियों को Ministry of Corporate Affairs (MCA) के पोर्टल पर कई अलग-अलग फॉर्म भरने पड़ते हैं। इनमें से कुछ फॉर्म काफी लंबे और जटिल होते हैं। नई योजना के तहत इन फॉर्म्स को छोटा और सरल बनाया जा सकता है।

सरकार चाहती है कि फाइलिंग के दौरान केवल जरूरी जानकारी ही मांगी जाए। इससे गलतियां कम होंगी और काम जल्दी पूरा हो सकेगा।

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कानून में बदलाव की तैयारी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सुधार को लागू करने के लिए कानूनी बदलाव भी जरूरी होंगे। इसलिए Companies Act 2013 और Limited Liability Partnership Act 2008 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया जा सकता है। इन संशोधनों का मकसद है कि कंपनियों पर कंप्लायंस का बोझ कम हो और वे अपने बिजनेस पर ज्यादा ध्यान दे सकें।

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फीस में मिल सकती है राहत

फाइलिंग फीस को लेकर भी राहत की संभावना जताई जा रही है। चर्चा है कि फीस पर एक अधिकतम सीमा तय की जा सकती है। इससे छोटे और मध्यम कारोबार को फायदा होगा।

साथ ही मामूली नियम उल्लंघन को लेकर सख्ती कम करने पर भी विचार हो रहा है। यानी छोटी गलती के लिए भारी सजा या केस की संभावना कम हो सकती है।

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कब लागू होंगे नए नियम?

माना जा रहा है कि इस प्रस्ताव से जुड़ा कैबिनेट नोट जल्द तैयार हो सकता है। उम्मीद है कि बजट सत्र के दूसरे चरण में इन बदलावों को पेश किया जा सकता है।

अगर यह सुधार लागू होता है तो कॉरपोरेट फाइलिंग सिस्टम पहले से ज्यादा साफ, आसान और पारदर्शी हो जाएगा। खासकर स्टार्टअप्स और छोटे कारोबारियों के लिए यह एक बड़ी राहत साबित हो सकती है।

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सरकार का फोकस साफ है कम कागजी काम, कम खर्च और ज्यादा सुविधा। आने वाले समय में इस दिशा में ठोस कदम देखने को मिल सकते हैं।