नई दिल्ली। पोस्ट ऑफिस से जल्द पैसा डबल करने वाली स्कीम अब निवेश के लिए 18 मार्च को ही बंद होने वाली है। पहले यह स्कीम 23 मार्च 2021 तक खुली रहने वाली थी। लेकिन उम्मीद से ज्यादा निवेश के लिए चलते अब कंपनी इस स्कीम को 18 मार्च को ही बंद करने जा रही है। जहां पोस्ट ऑफिस में पैसा 10 साल से ज्यादा में डबल होता है, वहीं इस कंपनी में निवेश करने पर पैसा केवल 87 महीने में ही डबल हो जाएगा। आइये जानते हैं कि यह पूरी स्कीम क्या है।
एनबीएफसी कंपनी आईआईएफएल ने नॉन-कंवर्टिबल डिबेंचर यानी एनसीडी लांच किया है। इस एनसीडी में पहले 23 मार्च 2021 तक निवेश किया जा सकता था। लेकिन कंपनी ने अब तय किया है कि वह केवल 18 मार्च तक ही निवेश स्वीकार करेगी। कंपनी ने बताया है कि वह एनसीडी को पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर एलाट करेगी।
एनबीएफसी कंपनी आईआईएफएल अपने इस एनसीडी से 1000 करोड़ रुपये जुटाने जा रही है। इन एनसीडी की लिस्टिंग मुम्बई शेयर बाजार (बीएसई ) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में कराई जाएगी। आईआईएलएफ ने इस काम के लिए लिंक इनटाइम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को अपना रजिस्ट्रार के रूप में नियुक्त किया है।
आईआईएफएल नॉन-कंवर्टिबल डिबेंचर (एनसीडी) को 1000 रुपये की फेसवैल्यू के बांड के रूप् में जारी करेगी। कंपनी ने तय किया है कि एनसीडी में न्यूनतम 10 बांड के लिए आवेदन करना होगा। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों को न्यूनतम 10,000 रुपये का निवेश इस एनसीडी को लेने के लिए करना होगा।
आईआईएफएल ने अपने नॉन-कंवर्टिबल डिबेंचर (एनसीडी) में निवेश के 3 विकल्प उपलब्ध कराए हैं। पहला है मासिक ब्याज लेने का विकल्प। दूसरा है सालाना ब्याज लेने का विकल्प और तीसरा विकल्प है 87 माह बाद डबल पैसे लेने का। तीसरे विकल्प में जो निवेशक पैसा लगाएंगे उनको मैच्योरिटी पर हर 1000 रुपये के बांड के बदले कंपनी 2000 रुपये का भुगतान करेगी। जहां तक ब्याज दरों की बात है, तो यह 10 फीसदी के हिसाब से मिलेगा।
आईआईएफएल के इस एनसीडी को क्रिसिल से निगेटिव आउटलुक के साथ एए रेटिंग दी है। वहीं ब्रिकवर्क रेटिंग्स से इसे निगेटिव आउटलुक के साथ एए प्लस रेटिंग दी है। इसका मतलब हुआ कि क्रेडिट रिस्क कम है, लेकिन पूरी तरह से सुरक्षित भी नहीं है।
नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (एनसीडी) इनेंशियल इंस्ट्रूमेंट होता है। इसे कोई भी कंपनी लांच कर सकती है। इनके जरिये कंपनियां निवेशकों से अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए पैसा जुटाती है। कंपनियां बांड या एनसीडी जारी करती है, जिसमें निवेश करने वालों को एक तय दर से ब्याज दिया जाता है। एनसीडी की अवधि तय होती है। इनकी मैच्योरिटी पर निवेशकों को ब्याज के साथ मूल रकम लौटा दी जाती है।
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