Budget 2026: आगामी आम बजट को लेकर तैयारियां शुरु हो चुकी है और इस बीच केंद्रीय बजट 2026 के करीब आते ही व्यक्तिगत आयकर सुधारों पर एक बार फिर से व्यापक बहस छिड़ गई है। वहीं, बजट की तैयारियों के बीच विवाहित जोड़ों यानी पति-पत्नी के लिए जॉइंट आयकर रिटर्न दाखिल करने की एक वैकल्पिक सिस्टम बनाए जाने का प्रस्ताव फिर से सुर्खियों में आ गया है।

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इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने भी यूनियन बजट 2026-27 के लिए अपने बजट से पहले के सुझावों में इस विचार का सुझाव दिया है। इंस्टीट्यूट ने शादीशुदा जोड़ों को अलग-अलग रिटर्न फाइल करने के बजाय संयुक्त रूप से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने का विकल्प देने का प्रस्ताव दिया है। आज ज़्यादातर मामलों में, भारत में दोनों पति-पत्नी, अगर कमाते हैं, तो अपना टैक्स रिटर्न अलग-अलग फाइल करते हैं।

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यह विचार ICAI की ओर से इससे पहले 2025 के बजट से पहले भी आया था, जिसमें परिवारों को लगभग 6-8 लाख रुपये की बढ़ी हुई मूल छूट के साथ एक साथ रिटर्न दाखिल करने की अनुमति देने का सुझाव दिया गया था। हालांकि, सरकार की ओर से इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया।

कपल के लिए सिंगल जॉइंट ITR पर क्या है एक्सपर्ट की राय?

यदि बजट 2026 में इस पहल पर विचार किया जाता है तो बढ़ती महंगाई से जूझ रहे सिंगल-अर्निंग वाले परिवारों को महत्वपूर्ण राहत मिल सकता है और देश के व्यक्तिगत टैक्स स्ट्रक्चर में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। पति-पत्नी के लिए जॉइंट इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की व्यवस्था बनाए जाने को लेकर वित्तीय सलाहकार और टैक्स एक्सपर्ट CA पराग जैन ने महत्वपूर्ण बात कही है।

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BT में छपी खबर के अनुसार, उन्होंने बताया कि भारतीय टैक्स कानून में फिलहाल जॉइंट टैक्सेशन की अनुमति नहीं है। जैन के अनुसार, "इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) जैसे पेशेवर निकायों ने इस अवधारणा की सिफारिश की है और यह बजट-पूर्व प्रस्तुतियों में शामिल रहा है। हालांकि, अभी तक कोई वित्त विधेयक या अधिसूचित संशोधन नहीं है, इसलिए यह बजट 2026 के लिए एक उम्मीद बनी हुई है।"

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पति-पत्नी के सिंगल जॉइंट रिटर्न सिस्टम की विशेषताएं

इस प्रस्ताव में पति-पत्नी के लिए एक वैकल्पिक सिस्टम का सुझाव दिया गया है, जहां वे दो अलग-अलग रिटर्न के बजाय एक सिंगल जॉइंट रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। इसकी मुख्य विशेषताओं में लगभग 6 लाख रुपये की बढ़ी हुई परिवार-स्तर की मूल छूट शामिल है, जिसे कुछ चर्चाओं में 8 लाख रुपये तक बढ़ाने का भी विचार है।

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संयुक्त आय के लिए एक अलग टैक्स स्लैब संरचना होगी, जो मौजूदा व्यक्तिगत टैक्स व्यवस्था से भिन्न होगी। यह सिस्टम स्वैच्छिक होगी, जिससे कपल (पति-पत्नी) को अपनी टैक्स स्थिति के अनुसार जॉइंट या अलग फाइलिंग चुनने की स्वतंत्रता मिलेगी।

जॉइंट रिटर्न सिस्टम के संभावित फायदे

यह भारत को अमेरिका और यूरोप के कुछ हिस्सों जैसे देशों के वैश्विक चलन के करीब लाएगी, जहां परिवार-आधारित टैक्सेशन मॉडल चलन में हैं। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो कई मध्यमवर्गीय परिवारों की टैक्स लायबिलिटी कम हो सकती है, खासकर जहां एक जीवनसाथी दूसरे से काफी अधिक कमाता है।

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यह उन असमानताओं को भी दूर करेगा जहां आय वितरण में भिन्नता के कारण समान कुल आय वाले परिवारों को अलग टैक्स परिणामों का सामना करना पड़ता है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ विस्तृत कर स्लैब डिज़ाइन और व्यक्तिगत आय परिदृश्यों पर निर्भर करेगा।

इस प्रस्ताव से प्रशासनिक चुनौतियां, पात्रता नियम, प्रणाली की तैयारी और राजस्व पर संभावित प्रभाव जैसी चिंताएं स्वाभाविक रूप से जुड़ी हैं। समान कमाई वाले दोहरे-आय वाले परिवारों को सीमित लाभ मिलने से समानता के प्रश्न भी उठते हैं।

इसके अतिरिक्त, केवल कर लाभ के लिए आय के कृत्रिम हस्तांतरण को रोकने हेतु कड़े सुरक्षा उपायों की आवश्यकता होगी, जिसे वर्तमान में आय क्लबिंग प्रावधानों के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है।

ICAI द्वारा प्रस्तावित जॉइंट फाइलिंग फ्रेमवर्क के तहत टैक्स स्लैब के प्रकार

  • ₹6 लाख तक की वार्षिक आय पर कोई कर नहीं
  • ₹6 लाख से ₹14 लाख के बीच की आय पर 5%
  • ₹14 लाख से ₹20 लाख के लिए 10%
  • ₹20 लाख से ₹24 लाख के लिए 15%
  • ₹24 लाख से ₹30 लाख के लिए 20%
  • ₹30 लाख से अधिक की आय पर 30% कर लागू होगा।

नए प्रस्ताव में, जॉइंट फाइलिंग सिस्टम के लिए मूल छूट सीमा को ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹6 लाख करने की सिफारिश की गई है। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने सरचार्ज की सीमा को भी ₹50 लाख से बढ़ाकर ₹1 करोड़ करने का सुझाव दिया है। प्रस्तावित संशोधित सरचार्ज दरें अब ₹1 करोड़ से ₹2 करोड़ तक की आय पर 10%, ₹2 करोड़ से ₹4 करोड़ तक पर 15%, और ₹4 करोड़ से अधिक की आय पर 20% होंगी।