EPFO: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से पेंशन पाने वाले लाखों लोगों के लिए बड़ी खबर सामने आ रही है। पिछले 11 सालों से EPFO की न्यूनतम पेंशन में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन अब सरकार इस दिशा में कदम उठाने पर विचार कर रही है। बढ़ती महंगाई के बीच पेंशनधारकों को लंबे समय से राहत का इंतजार था, जो अब खत्म हो सकता है।

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क्यों जरूरी हो गई पेंशन बढ़ोतरी?

साल 2014 में EPFO की कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपए तय की गई थी। उस समय खर्च कम थे, लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। खाने-पीने की चीजें, दवाइयां, इलाज, बिजली और रोजमर्रा का खर्च काफी बढ़ गया है। ऐसे में 1,000 रुपए की पेंशन से गुजारा करना बेहद मुश्किल हो गया है।

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सरकार क्या सोच रही है?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार EPFO पेंशन बढ़ाने के प्रस्ताव पर गंभीरता से चर्चा कर रही है। माना जा रहा है कि इस साल के बजट के दौरान या उसके बाद इस पर कोई फैसला लिया जा सकता है। अगर यह फैसला आता है, तो करोड़ों पेंशनधारकों को सीधा फायदा मिलेगा।

यूनियनों की क्या है मांग?

कर्मचारी संगठनों और यूनियनों का कहना है कि मौजूदा पेंशन बहुत कम है। उनका तर्क है कि बीते 11 सालों में महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है, लेकिन पेंशन में कोई सुधार नहीं हुआ। इसी वजह से यूनियन न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 7,000 से 10,000 रुपए प्रति माह करने की मांग कर रही हैं।

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EPFO पेंशन कैसे बनती है?

EPFO के नियमों के तहत कर्मचारी और कंपनी दोनों वेतन का 12-12 प्रतिशत योगदान करते हैं। कंपनी के हिस्से में से 8.33 प्रतिशत राशि पेंशन योजना (EPS) में जाती है, जबकि बाकी पैसा EPF खाते में जमा होता है। रिटायरमेंट के बाद इसी पेंशन फंड से मासिक पेंशन दी जाती है।

पेंशन बढ़ने से क्या फायदा होगा?

अगर न्यूनतम पेंशन बढ़ाई जाती है, तो बुजुर्ग पेंशनधारकों की जिंदगी आसान होगी। उन्हें दवाइयों, इलाज और रोजमर्रा के खर्चों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। खासकर उन लोगों को राहत मिलेगी, जिनकी आय का एकमात्र सहारा पेंशन ही है।

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आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल सभी की नजर सरकार के फैसले पर टिकी हुई है। अगर EPFO पेंशन में बढ़ोतरी का ऐलान होता है, तो यह 11 साल से इंतजार कर रहे पेंशनधारकों के लिए बड़ी खुशखबरी साबित होगी और उनकी आर्थिक चिंता कुछ हद तक कम हो सकेगी।