27 जुलाई को भारतीय रुपये में जोरदार मजबूती देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की खबरों से ब्रेंट क्रूड 5% गिरकर 90 डॉलर के नीचे आ गया, जिससे भारत के तेल बिल का बोझ कम होने की उम्मीद जगी है। शेयर बाजार में तेजी है और ट्रेडर्स अब डॉलर में अपनी लॉन्ग पोजीशन कम कर रहे हैं। बाजार के इस बदलते मिजाज ने निवेशकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि 30 से 180 दिनों के लिए अपना पैसा कहां पार्क करें: लिक्विड फंड्स, आर्बिट्राज फंड्स या फिर शॉर्ट-टर्म FD में?
आज के आंकड़े निवेश की दिशा तय करने में मदद करते हैं। 91 से 364 दिनों के ट्रेजरी बिल (T-bills) पर करीब 5.33% से 5.77% तक रिटर्न मिल रहा है। वहीं, HDFC बैंक 90 से 180 दिनों की FD पर 4.25% और 6 से 9 महीनों के लिए 5.50% ब्याज ऑफर कर रहा है। लिक्विड फंड्स का 7 दिनों का यील्ड 6.2% से 6.5% के आसपास है, जबकि एक महीने के आर्बिट्राज रिटर्न 0.5% से 0.7% के बीच रहे हैं।
लिक्विड बनाम आर्बिट्राज फंड्स बनाम 3–6 महीने की FD
लिक्विड फंड्स में पैसा निकालना आसान होता है और इनमें रिस्क भी काफी कम है; आमतौर पर पैसा T+1 दिन में मिल जाता है। हालांकि, पहले 6 दिनों के भीतर रिडेम्पशन पर एक तय एग्जिट लोड लगता है और 0.005% स्टैम्प ड्यूटी भी देनी होती है। दूसरी ओर, आर्बिट्राज फंड्स कैश और फ्यूचर्स मार्केट के अंतर (स्प्रेड) से कमाई करते हैं। इनमें 15 से 30 दिनों के भीतर पैसा निकालने पर अक्सर 0.25% एग्जिट लोड लगता है और रिडेम्पशन पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) भी चुकाना पड़ता है।
| निवेश का विकल्प | अनुमानित रिटर्न (सालाना) | नेट रिटर्न (30% टैक्स स्लैब) |
|---|---|---|
| लिक्विड फंड्स (7-दिन) | ~6.3% | ~4.4% |
| आर्बिट्राज फंड्स | ~6.5% | ~5.2% (20% STCG) |
| 91-दिन का T-bill | ~5.33% | ~3.7% |
| 182-दिन का T-bill | ~5.56% | ~3.9% |
| 364-दिन का T-bill | ~5.77% | ~4.0% |
| टॉप बैंक FD (90–180 दिन) | 4.25–5.50% | ~3.0–3.85% |
निवेश का फैसला टैक्स के बाद होने वाली असली कमाई पर निर्भर करता है। डेट फंड्स और T-bills पर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। उदाहरण के लिए, 6.3% रिटर्न वाले लिक्विड फंड पर 20% स्लैब वालों को नेट 5.0% और 5% स्लैब वालों को 6% रिटर्न मिलेगा। आर्बिट्राज फंड्स को इक्विटी की तरह टैक्स किया जाता है; इनके शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) पर 20% टैक्स और मामूली STT लगता है, जिससे नेट रिटर्न करीब 5.2% के आसपास रहता है।
T-bill और RBI रिटेल डायरेक्ट का विकल्प
30 से 180 दिनों के निवेश के लिए RBI रिटेल डायरेक्ट के जरिए ट्रेजरी बिल खरीदना एक पारदर्शी और सुरक्षित विकल्प है, जिसे NDS-OM पर आसानी से बेचा जा सकता है। कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन मुफ्त में 'रिटेल डायरेक्ट गिल्ट अकाउंट' खोल सकता है और साप्ताहिक नीलामी में हिस्सा ले सकता है। इसमें निवेश की शुरुआत महज 10,000 रुपये से की जा सकती है। मैच्योरिटी का पैसा सीधे आपके बैंक खाते में आता है और इसके लिए डीमैट अकाउंट की जरूरत नहीं होती। बस नीलामी और इश्यू की तारीखों के हिसाब से अपनी प्लानिंग करें।
अब सवाल है कि अभी क्या चुनें? अगर एक हफ्ते से कम समय के लिए पैसा रखना है, तो मामूली एग्जिट लोड के बावजूद लिक्विड फंड्स बेहतर हैं। 30 से 90 दिनों के लिए लिक्विड फंड्स में लचीलापन मिलता है, लेकिन अगर आप थोड़ा रिस्क ले सकते हैं तो आर्बिट्राज फंड्स भी अच्छे हैं। वहीं, 90 से 180 दिनों के लिए 91-दिन और 182-दिन के T-bills को मिलाकर निवेश करना (लैडरिंग) सही रहेगा। हालांकि, ऊंचे टैक्स स्लैब वाले निवेशकों के लिए बेहतर नेट रिटर्न के मामले में आर्बिट्राज फंड्स अब भी पहली पसंद हो सकते हैं।
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