बैंक ऑफ महाराष्ट्र (BoM) ने अपने ग्राहकों को झटका देते हुए मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 19 मई, 2026 से प्रभावी हो गई हैं। इस बदलाव का सीधा असर देशभर के उन पुराने ग्राहकों पर पड़ेगा जिनकी मासिक किस्त (EMI) अब बढ़ने वाली है। चूंकि होम और कार लोन जैसे ज्यादातर रिटेल लोन इसी बेंचमार्क से जुड़े होते हैं, इसलिए कर्जदारों की जेब पर अब बोझ बढ़ना तय है।

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फंड की बढ़ती लागत के कारण कई सरकारी बैंक ब्याज दरें बढ़ाने को मजबूर हैं। हाल ही में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने भी दरों में ऐसा ही इजाफा किया था। हालांकि नए ग्राहकों के लोन अब रेपो रेट से जुड़े होते हैं, लेकिन पुराने ग्राहकों के लिए सालाना रीसेट की प्रक्रिया होती है। इन साइकिल्स को समझकर आप अपना मंथली बजट बेहतर तरीके से मैनेज कर सकते हैं। ब्याज दरों में होने वाले ये छोटे बदलाव लंबे समय में एक बड़ी रकम बन जाते हैं।

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Bank of Maharashtra MCLR Hike: जानें आपकी EMI पर कितना पड़ेगा असर

बैंक ने ब्याज दरों में 5 से 10 बेसिस पॉइंट्स का इजाफा किया है। इसका सबसे ज्यादा असर एक साल वाले साइकिल वाले लोन पर दिखेगा, जिसमें ज्यादातर होम लोन शामिल होते हैं। नीचे दी गई टेबल के जरिए आप समझ सकते हैं कि इस बढ़ोतरी के बाद आपकी मासिक किस्त कितनी बढ़ जाएगी। इससे आपको अपने सालाना खर्चों और बजट को दोबारा प्लान करने में मदद मिलेगी।

लोन की राशिब्याज दर में बढ़ोतरीEMI में मासिक बढ़ोतरी
Rs 30 Lakh0.10%लगभग Rs 190
Rs 50 Lakh0.10%लगभग Rs 320
Rs 75 Lakh0.10%लगभग Rs 480

MCLR बनाम रेपो-लिंक्ड रेट: आपके लिए क्या है बेहतर?

अगर आप बढ़ते ब्याज का बोझ कम करना चाहते हैं, तो रेपो-लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) सिस्टम में स्विच करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इस एक्सटर्नल बेंचमार्क का फायदा यह है कि जब भी आरबीआई दरों में कटौती करता है, उसका लाभ ग्राहकों तक तेजी से पहुंचता है। इसके लिए आपको अपनी बैंक ब्रांच जाकर एक फॉर्म देना होगा। हालांकि, किसी भी नए दस्तावेज पर साइन करने से पहले प्रोसेसिंग फीस के बारे में जरूर जान लें।

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बैंक से बेहतर डील पाने के लिए आपका क्रेडिट स्कोर मजबूत होना बहुत जरूरी है। अगर आपको लगता है कि ब्याज दरें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं, तो आप किसी दूसरे बैंक में लोन ट्रांसफर करने पर भी विचार कर सकते हैं। आर्थिक उतार-चढ़ाव के बीच सही प्लानिंग ही आपके कर्ज को काबू में रखेगी। अपनी मेहनत की कमाई और मंथली इनकम को सुरक्षित रखने के लिए वित्तीय खबरों और बैंक की नई पॉलिसियों पर नजर बनाए रखें।