15 जून यानी एडवांस टैक्स भरने की आखिरी तारीख आ गई है। इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स और बिजनेस चलाने वालों को आज अपनी कुल अनुमानित टैक्स लायबिलिटी का 15 फीसदी हिस्सा जमा करना होगा। अगर आप यह डेडलाइन चूक जाते हैं, तो सेक्शन 234C के तहत भारी ब्याज देना पड़ सकता है। यह नियम उन लोगों पर लागू होता है जिनका सालाना टैक्स 10,000 रुपये से ज्यादा बनता है। सही कैश फ्लो प्लानिंग के जरिए आप इस फालतू के खर्च से प्रभावी ढंग से बच सकते हैं।

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टैक्स के पैसे को कुछ समय के लिए सुरक्षित रखने के लिए निवेशक अक्सर बेहतर विकल्पों की तलाश में रहते हैं। इसके लिए आप सेविंग्स अकाउंट, लिक्विड फंड्स या स्वीप-इन फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) चुन सकते हैं। इन सभी विकल्पों में लिक्विडिटी और रिटर्न का स्तर अलग-अलग होता है। टैक्स पेमेंट के लिए सही बैलेंस बनाना बहुत जरूरी है। खासकर हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) को सोमवार को पेमेंट करने के लिए बड़ी रकम की तुरंत जरूरत होती है।

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एडवांस टैक्स के लिए लिक्विड फंड्स और स्वीप-इन FD का ऐसे करें इस्तेमाल

अगर आप 15 फीसदी एडवांस टैक्स जमा करने में चूक जाते हैं, तो आपको पेनल्टी देनी होगी। सेक्शन 234C के तहत कम भुगतान वाली राशि पर हर महीने 1 फीसदी का ब्याज लगता है। यह ब्याज अगली किस्त की तारीख तक यानी पूरे तीन महीने के लिए जोड़ा जाता है। टैक्स का बोझ कम रखने के लिए सही अनुमान लगाना बेहद जरूरी है। लगातार प्लानिंग करने से आप भारी-भरकम ब्याज से बच सकते हैं, जो आपकी सालाना बचत को नुकसान पहुंचा सकता है।

लिक्विड फंड्स में रेगुलर सेविंग्स अकाउंट के मुकाबले ज्यादा रिटर्न मिलता है। हालांकि, इसमें आपको T+0 या T+1 रिडेम्पशन साइकिल का ध्यान रखना होगा। ज्यादातर म्यूचुअल फंड्स में उसी दिन पैसा निकालने के लिए एक तय कट-ऑफ टाइम होता है। वहीं, सरकारी भुगतान के लिए स्वीप-इन FD ज्यादा सुविधाजनक होती है क्योंकि इससे तुरंत फंड ट्रांसफर किया जा सकता है। आपका चुनाव इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी टैक्स राशि कितनी है और आपका बैंक के साथ कैसा लिंक है।

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विकल्पअनुमानित रिटर्नलिक्विडिटी का प्रकार
सेविंग्स अकाउंट2.7% - 4.0%तुरंत
स्वीप-इन FD5.5% - 7.0%तुरंत
लिक्विड फंड्स6.5% - 7.5%T+0 / T+1

पेमेंट के लिए UPI या RTGS जैसे डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया जा सकता है। बड़ी रकम के भुगतान के लिए नेट बैंकिंग या RTGS सबसे बेहतर रहते हैं ताकि प्रोसेसिंग में कोई दिक्कत न आए। सोमवार की डेडलाइन से पहले अपने बैंक की ट्रांजैक्शन लिमिट जरूर चेक कर लें। सुनिश्चित करें कि सुबह तक आपके प्राइमरी अकाउंट में पैसा तैयार रहे, ताकि आखिरी घंटों में सर्वर की दिक्कतों और तकनीकी खराबी से बचा जा सके।