नयी दिल्ली। अगर आप अपना नया घर खरीदने की योजना बना रहे हैं तो प्रधानमंत्री आवास योजना आपकी मदद कर सकती है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आप पहला घर बनाने या खरीदने के लिए सरकार की तरफ से होम लोन पर ब्याज सब्सिडी का लाभ ले सकते हैं। इस योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जून 2015 में की थी, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर तबके के परिवारों को सस्ता मकान मुहैया करवाना है। प्रधानमंत्री आवास योजना या PMAY के हिस्से हैं। पहला प्रधानमंत्री आवास योजना - शहरी और दूसरा प्रधानमंत्री आवास योजना - ग्रामीण। सरकार ने 2022 तक आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए 2 करोड़ सस्ते मकान तैयार करने का लक्ष्य रखा है। अगस्त तक के आँकड़ों के मुताबिक 1.12 करोड़ कुल मकानों की माँग के मुकाबले 88 लाख मकानों को मंजूरी दे दी गयी है। इस योजना के और भी बहुत सारे फायदे हैं। आइये जानते हैं उनके बारे में।
PMAY आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए शुरू की गयी योजना है। आपको बता दें कि वार्षिक तीन लाख रुपये से कम आमदनी वाले ईडब्लयूए श्रेणी में आते हैं। वहीं 6 लाख रुपये तक सालाना आमदनी वाले निम्न आय वर्ग कैटेगरी में आते हैं। यदि आप इन दोनों श्रेणियों में किसी में हैं तो आवास योजना के तहत 6 लाख रुपये तक के लोन पर आप 6.5% तक ब्याज सब्सिडी का लाभ ले सकते हैं। इसके अलावा मध्य आय वर्ग -1 के लोगों को 9 लाख रुपये तक लोन पर 4% और मध्य आय वर्ग-2 के लोगों को 12 लाख रुपये तक के होम लोन पर 3% ब्याज सब्सिडी मिलेगी।
यदि आप होन लोन रहे हैं तो बैंक द्वारा आपको दिये मूल लोन रकम में से कटौती करके सब्सिडी आपके खाते में जमा की जायेगी। इसके बाद आपको मूल लोन राशि पर ही कर्ज दर के मुताबिक ईएमआई भरनी होगी। एक उदाहरण से इसे समझें कि यदि आप 6 लाख रुपये का लोन लेते हैं, तो इस पर सब्सिडी करीब 2.67 लाख रुपये बनेगी। अब आपको दिये गये कुल लोन में यह सब्सिडी राशि घटा दी जायेगी और बचे हुए 3.33 लाख रुपये पर ही आपको ईएमआई जमा करनी होगी। इस योजना के तहत आप घर बनाने के लिए भी कर्ज ले सकते हैं।
यदि आप किसी डेवलपर या बिल्डर और यहाँ तक कि रीपर्चेज के माध्यम से सेकंडरी बाजार से घर खरीदना चाह रहे हैं तो भी आप इस योजना का फायदा उठा सकते हैं। इस योजना का लाभ लेने से पहले से ध्यान रखें कि आपके या परिवार के किसी सदस्य के नाम पूरे देश में कहीं भी पक्का मकान नहीं होना चाहिए। साथ ही आपकी आय तय सीमा के दायरे में होनी चाहिए। कई बैंक और निजी कंपनियाँ भी सरकार की इस योजना में अपना योगदान दे रही हैं।
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