नई द‍िल्‍ली: हर कोई अपने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए टर्म लाइफ इंश्योरेंस प्लान खरीदते है। इतना ही नहीं अलग-अलग इंश्योरेंस कंपनियां भी अनेक फायदे गिना कर ग्राहकों को इनसे जोड़ती है। लेकिन ये बात भी सच है कि इन टर्म लाइफ इंश्योरेंस प्लान के साथ कई ऐसी शर्तें होती हैं जिन्हें हम अकसर अनदेखा कर देते हैं। या यूं कहें क‍ि कंपन‍ियां भी जिनके बारे में हमें नहीं बताती है। कंपनियां पॉलिसीधारक को कब और किस शर्त पर उसका पैसा देगी यह पूर्व निर्धारित होता है। जानकारी दें पॉलिसीधारक की मौत इन 8 शर्तों के मुताबिक होती है तो उसे टर्म लाइफ इंश्योरेंस प्लान का एक भी पैसा नहीं दिया जाता।

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जानें कंपनी के इन 8 शर्तों के बारें में

1 . शराब की वजह से मौत

अगर किसी पॉलिसीधारक की मौत शराब की वजह से होती है तो उसे इंश्योरेंस क्लेम नहीं दिया जाता। जानकारी के मुताबिक कंपनी उन पॉलिसीधारक को इंश्योरेंस क्लेम नहीं देती जो भारी मात्रा में शराब पीते हैं और नशीली दवाओं का सेवन करते हैं। अगर पॉलिसीधारक प्लान लेते वक्त इस बात का जिक्र नहीं करते कि वह भारी मात्रा में शराब पीते हैं तो कंपनियां पॉलिसीधारक की मौत होने पर इंश्योरेंस क्लेम नहीं देती।

2. स्मोकिंग की आदत की जानकारी छिपाना

अगर आप स्मोकिंग करते हैं तो टर्म प्लान लेते वक्त इसके बारे में कंपनी को जानकारी दें। स्मोकिंग करने वालों को अक्सर हेल्थ से जुड़ी समस्याएं प्रभावित करती हैं। अगर पॉलिसीधारक कंपनी को यह नहीं बताते कि वे भारी मात्रा में स्मोकिंग करते हैं और स्मोकिंग की वजह से पॉलिसीधारक की मौत हो जाती है तो फिर कंपनी इंश्योरेंस क्लेम का पैसा नहीं देती।

3. खतरनाक गतिविधियों में शामिल होना

अगर किसी पॉलिसीधारक की एडवेंचर और खतरनाक गतिविधियों में शामिल होने की वजह से मौत हो जाती है तो कंपनी इंश्योरेंस क्लेम से इनकार कर देती है। क्योंकि ये वे गतिविधियां हैं जिनमें पॉलिसीधारक अपनी जिंदगी को खतरे में डालते हैं।

4. एचआईवी और ड्रग ओवरडोज

जानकारी दें कि कंपनी ऐसे पॉलिसीधारक को इंश्योरेंस क्लेम की अनुमति नहीं देती जिनकी मौत एचआईवी और ड्रग ओवरडोज से होती है। वहीं शारीरिक बीमारी जैसे की एचआईवी या एड्स से होने वाली मौत पर कंपनी इंश्योरेंस क्लेम के लिए मना करती हैं। इसके साथ ही ड्रग ओवरडोज से अगर किसी पॉलिसीधारक की मौत होती है तो भी इंश्योरेंस क्लेम नहीं मिलता।

5. मौत की वजह आत्महत्या

अगर कोई पॉलिसीधारक आत्महत्या कर लेता है तो भी कंपनी इंश्योरेंस क्लेम से इनकार कर सकती है। अगर पॉलिसीधारक टर्म प्लान लेने के एक साल के अंदर आत्महत्या कर लेता है तो नॉमिनी को इंश्योरेंस क्लेम की अनुमति नहीं मिलेगी। हालांकि अधिकांश कंपनियां पॉलिसी खरीद की तारीख के दूसरे वर्ष से आत्महत्या कवरेज प्रदान करते हैं।

6. बच्‍चे के जन्‍म के कारण मौत

ड‍िलिवरी के दौरान अगर पॉलिसीधारक की मौत हो जाती है तो कंपनी इंश्योरेंस क्लेम नहीं देती। जानकारी के मुताब‍िक प्रेगनेंसी के दौरान, या फिर प्रसव के दौरान होने वाली मौत पर इंश्योरेंस क्लेम नहीं दिया जाता।

7. प्राकृति आपदा से मौत

अगर किसी पॉलिसीधारक की मौत प्राकृतिक आपदा जैसे कि भूकंप या फिर तूफान आदि से होती है तो नॉमिनी को इशोयरेंस क्लेम नहीं दिया जाता।

8. पॉलिसीधारक का मर्डर

अगर किसी पॉलिसी धारक का मर्डर हो जाता है और जांच में यह पता चलता है कि वह किसी क्राइम में भागीदार था तो कंपनी उसे पैसा नहीं देगी। वहीं दूसरी ओर पॉलिसीधारक की मौत आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने की वजह से होती है तो तब भी उसे इंश्योरेंस क्लेम नहीं दिया जाएगा।