म्यूचुअल फंड कंपनियों के मैनेजमेंट एसेट नवंबर अंत तक आठ फीसदी बढ़कर 24.03 लाख करोड़ रुपये हो गई। इससे पिछले महीने यानी अक्टूबर अंत तक यह आंकड़ा 22.23 लाख करोड़ रुपये था। इसकी अहम वजह लिक्विड इन्वेस्टमेंट योजनाओं में होने वाला मजबूत निवेश है।

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म्यूचुअल फंड कंपनियों के संगठन एएमएफआई के अनुसार, भारत के एक सबसे तेजी से उभरती इकॉनमी बनने और इन्फ्लेशन रेट के नीचे आने से निकट भविष्य में शेयरों के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।

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एएमएफआई के मुख्य कार्यकारी एन. एस. वेंकटेश ने कहा, हमें उम्मीद है कि अगले साल और अधिक निवेशक म्यूचुअल फंड को निवेश विकल्प के तौर पर चुनेंगे। एएमएफआई के आंकड़ों के अनुसार 42 म्यूचुअल फंड कंपनियों के प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियां अक्टूबर के अंत तक 22.23 लाख करोड़ रुपये थी। नवंबर के अंत तक यह बढ़कर 24.03 लाख करोड़ रुपये हो गई। सभी कंपनियों का कुल परिसंपत्ति आधार नवंबर अंत तक 22.79 लाख करोड़ रुपये रहा।

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हांलाकि लिक्विड इन्वेस्टमेंट योजनाओं में कुल 1.36 लाख करोड़ रुपये निवेश हुआ है। इसके अलावा शेयर और उससे जुड़ी निवेश योजना में 8,400 करोड़ रुपये और संतुलित निवेश योजनाओं में 215 करोड़ रुपये निवेश किए गए हैं।

इसी तरह गोल्ड ईटीएफ में 10 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। वहीं आय कोष में 6,518 करोड़ रुपये की निकासी हुई। नवंबर में म्यूचुअल फंड में कुल निवेश 1.42 लाख करोड़ रुपये रहा जो अक्टूबर के 35,500 करोड़ रुपये के निवेश से कहीं अधिक है।