यदि सब-कमेटी की सिफारिशों को मान लिया जाएगा तो आने वाले समय में गाडि़यों का इंश्‍योरेंस प्रीमियम सुरक्षित ड्राइविंग के आधार पर तय होगा। इकोनॉमिक्‍स टाइम्‍स की रिर्पोट के अनुसार एक सब-कमेटी में इंश्‍योरेंस रेग्‍युलेटर इरडा (IRDA) को सौंपी अपनी रिर्पोट में सिफारिश की है कि गाड़ी का इंश्‍योरेंस प्रीमियम सुरक्षित ड्राइविंग के आधार पर तय किया जाए।

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साथ ही यह देखा जाएगा कि जिस गाड़ी का बीमा किया जा रहा है, उसके कितने एक्‍सीडेंट हुए और वह कितनी चली है। जो गाड़ी कम चली हो उसका इंश्‍योरेंस प्रीमियम कम हो। जिसका एक्‍सीडेंट न हुआ हो, उसे भी इंश्‍योरेंस प्रीमियम में कुछ छूट दी जाए। तो दूसरी तरफ जो गाड़ी ज्‍यादा चली हो और जिसका ऐक्‍सीडेंट हुआ है, उसका इंश्‍योरेंस प्रीमियम ज्‍यादा रखा जाए।

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आपको बता दें कि इस बारे में कमेटी का तर्क है कि भारत में लोग निजी वाहनों को ज्‍यादा इस्‍तेमाल करते हैं। ज्‍यादातर कार में एक आदमी होता है इसका मतलब है कि एक आदमी भी बाहर जाने के लिए कार का इस्‍तेमाल करता है। इससे जहां सड़कों पर जाम लग रहा है, रोड ऐक्‍सीडेंट भी ज्‍यादा हो रहे हैं और प्रदूषण भी बढ़ रहा है। ऐसे में इंश्‍योरेंस प्रीमियम में छूट लोगों को प्राइवेट की गाड़ी के कम इस्‍तेमाल करने के लिए प्रेरित करेगी।