क्या आपका रिटायरमेंट होने वाला है क्या आपने रिटायरमेंट से संबंधित कोई प्लान किया है? शायद ऐसा कुछ आपने नहीं किया होगा, क्योंकि ज्यादातर लोग रिटायरमेंट के लिए प्लानिंग करते समय उत्साहित नहीं होते हैं। इसका कारण यह है कि रिटायरमेंट के दौरान लोगों को अलग से कोई इंसेटिव नहीं मिलते हैं। पर आपको बता दें कि रिटायरमेंट प्लानिंग सिर्फ पैसे के प्रबंध से नहीं जुड़ी है। पैसे से ज्यादा इस बात के लिए आपको रिटायरमेंट प्लानिंग करनी चाहिए कि आपके जीवन के सुकून के पल कैसे बीतने वाले हैं। तो आइए जानते हैं कि रिटायरमेंट से पहले कौन से प्लान बनाना जरुरी है-
बहुत से लोग सेवानिवृत्ति के बाद परेशान हो जाते हैं क्योंकि उन्होंने आने वाले खाली समय के लिए कोई प्लानिंग नहीं की होती है। तो ऐसे में जरुरी है कि आप किसी ऐसे काम में खुद को लगाएं जो 8-12 घंटों के लिए आपको व्यस्त रख सके। यह बात सिर्फ घर के लोगों के साथ ही लागू नहीं होती बल्कि एक होमेकर के साथ भी लागू होती है।
नौकरी करने के दौरान अक्सर आपने बहुत से सामाजिक कार्य करने के बारे में सोचा होता है लेकिन आप इन्हें पूरा नहीं कर पाते क्योंकि आपके पास जॉब के दौरान समय नहीं रहता है या आपकी प्राथमिकताएं कुछ और होती हैं। रिटायरमेंट के बाद आप अपनी सारी इच्छाएं और शौक पूरे कर सकते हैं। इससे आपको खाली समय भी कट जाएगा और मेंटली और फिजिकली सक्रिय भी रहेंगे।
नौकरी करते वक्त समय की कमी के कारण आप शायद घूमने-फिरने का काम अच्छे से नहीं कर पाते हैं परन्तु रिटायरमेंट के बाद अगर आपके पास बचत है तो आप यात्रा की योजना बना सकते हैं। रिटायरमेंट आपको उन सारी जगहों को घूमने का अवसर प्रदान करता है बशर्ते आपने इसके लिए पहले से ही सेविंग करके रखी हो।
यदि आपने हेल्थ इंश्योरेंस कर रखा है तो आपके रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी बिना किसी चिंता के गुजरेगी। तो वहीं यदि आपने जॉब करने के दौरान हेल्थ से जुड़ी कोई योजना नहीं ली है तो इसे प्लान करने में थोड़ी देर हो चुकी है क्योंकि आपकी सेवानिवृत्ति के समय चूंकि आपकी उम्र थोड़ी ज्यादा होती है इसलिए कई बीमारियां भी शरीर में जगह बनाना शुरू कर देती हैं।
रिटायरमेंट के बाद अपने लिए बहुत बड़ा घर रखकर उसकी देखभाल में ही सारा समय बर्बाद करने से अच्छा है कि घर को किराए पर देकर नियमित आमदनी का आनंद उठाएं। तो वहीं सारी पूंजी पहले से ही अपने बेटे-बेटी, संबंधियों, ट्रस्ट या मंदिर को न दें। अपनी वसीयत के माध्यम से अपनी संपत्ति को देना बेहतर निर्णय होगा। इसे अलावा रिटायरमेंअ के बाद बची पूंजी को शेयर बाजार, कमोडिटी में लगाकार नए प्रयोग करने से बचें। साथ ही 60 साल के बाद नया कारोबार शुरु करने के लिए रिटायरमेंट फंड का इस्तेमाल करना जोखिम से भरा हो सकता है।
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