नोटबंदी के दौरान 2016 में लोगों को कैश या नकद के संकट का सामना करना पड़ रहा था और एटीएम तो जैसे सूख से गए थे। वही हाल एक बार फिर हुआ है लोगों को एटीएम से पैसे नहीं मिल रहे हैं। ऐसे परिस्थितियों से निपटने के लिए देश में कई डिजिटल माध्यमों की सरकार पेशकश की है। यानी कि कैश न होने पर आप ऑनलाइन पैसों का लेनदेन बड़े ही आसानी से कर सकते हैं। बैंक कई लेनदेन के कई तरीके हमें प्रदान करते हैं। इनमें से आरटीजीएस (RTGS), एनईएफटी (NEFT)और आईएमपीएस (IMPS) कुछ भुगतान प्रणाली हैं जो फंड ट्रांसफर की सुविधा प्रदान करते हैं।
आरटीजीएस, एनईएफटी और आईएमपीएस फंड ट्रांसफर के बारे में आपको यहां पर विस्तार से बताएंगे-
आरबीआई की वेबसाइट के अनुसार, एनईएफटी एक भुगतान प्रणाली है जो एक से एक धन हस्तांतरण की सुविधा प्रदान करती है। एनईएफटी के तहत, कोई भी किसी भी बैंक शाखा से किसी भी व्यक्ति, फर्म या कॉर्पोरेट को इलेक्ट्रॉनिक रूप से धन हस्तांतरण कर सकता है, जिसमें देश की किसी अन्य बैंक शाखा के साथ खाता है। जिन व्यक्तियों के पास बैंक खाता नहीं है, वे एनईएफटी का उपयोग करके नकदी भी जमा कर सकते हैं। हालांकि, ऐसे नकद प्रेषण अधिकतम 50,000रु तक प्रति लेनदेन सीमित हैं।
NEFT के तहत हर दिन सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक पैसे ट्रांसफर करने का काम किया जा सकता है। सिवाय सप्ताह के दूसरे और चौथे शनिवार को छोड़कर। मात्र 3 घंटे में पहली बार ट्रांसफर करने वाला व्यक्ति इसके द्वारा पैसे प्राप्त कर सकता है।
हालांकि, NEFT के द्वारा पैसे ट्रांसफर करने को लेकर कोई मिनियम बैलेंस की लिमिट नहीं है। तो वहीं अगर आपको कोई पैसे एनईएफटी के माध्यम से भेजता है तो भी आपको किसी प्रकार के शुल्क का भुगतान नहीं करना होगा यानि की इसके माध्यम से पैसे प्राप्त करने की प्रक्रिया फ्री होगी।
जबकि पैसे भेजने वाले को 10 हजार रुपए तक के ट्रांसफर पर 2.50 रुपए देने होंगे। जिसमें की जीएसटी में शामिल होगा। 10 हजार से 1 लाख रुपए तक के चार्जेस 5 रुपए प्लस जीएसटी, 1 से 2 लाख रुपए तक के ट्रांसफर पर 15 रुपए प्लस जीएसटी, तो वहीं 2 लाख रुपए से ज्याटा के ट्रांजेक्शन पर 25 रुपए चार्ज प्लस जीएसटी। NEFT या RTGS के द्वारा ऑनलाइन पैसे कैसे ट्रांसफर करें?
भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक, आरटीजीएस का मतलब है कि बिना किसी नेटिंग के ऑर्डर के आधार पर ऑर्डर पर व्यक्तिगत रूप से फंड ट्रांसफर का निरंतर या रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट। 'रीयल टाइम' का अर्थ है कि उस समय पर नहीं बल्कि कुछ समय बाद, 'सकल निपटान' का अर्थ है कि फंड हस्तांतरण निर्देशों का निपटारा निर्देश के आधार पर होता है।
आम तौर पर लाभार्थी शाखाओं को रीयल-टाइम में धनराशि प्राप्त करने की उम्मीद होती है जैसे ही उन्हें प्रेषण बैंक द्वारा स्थानांतरित किया जाता है। लाभार्थी बैंक को फंड ट्रांसफर संदेश प्राप्त करने के 30 मिनट के भीतर लाभार्थी के खाते को क्रेडिट करना होगा।
आरटीजीएस प्रणाली मूल रूप से बड़े पैमाने पर लेनदेन के लिए है। आरटीजीएस के माध्यम से स्थानांतरित करने की न्यूनतम राशि 2 लाख रुपये है। हालांकि, आरटीजीएस लेनदेन पर कोई ऊपरी सीमा नहीं है।
आरटीजीएस सेवाओं को वर्किंग डे पर 9.00 से 4.30 तक और शनिवार को 9.00 बजे से 2:00 बजे आरबीआई के अंत में निपटारे के लिए एक्सेस कर सकते हैं। हालांकि, बैंक शाखाओं के ग्राहक समय के आधार पर बैंकों का समय अलग-अलग हो सकता है।
RTGS के माध्यम से रिसीवर को किसी प्रकार का शुल्क देने की आवश्यकता नहीं होती है यानि कि रिसीवर को फ्री में यह सुविधा प्राप्त होती है। तो वहीं पैसे भेजने वाले को मूल बैंक शाखाओं से बाहर या अन्य बैंकों से लेनदेन में 2 से 5 लाख रुपए तक ट्रांसफर में 30 रुपए चार्जेस लगते हैं। तो वहीं 5 लाख रुपए से ज्यादा के लेनदेन पर 55 रुपए वसूलने जाते हैं।
आईएमपीएस एक रियल टाइम भुगतान सेवा है जिसे छुट्टियों सहित पूरे दिन उपयोग किया जा सकता है। यह सेवा राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा प्रदान की जाती है जो ग्राहकों को बैंकों और आरबीआई द्वारा अधिकृत प्रीपेड पेमेंट इंस्टूमेंट (PPIs) जारीकर्ताओं के माध्यम से तत्काल पैसे ट्रांसफर करने का विकल्प प्रदान करती है। पीपीआई भुगतान साधन हैं जो ऐसे उपकरणों पर संग्रहीत मूल्य के खिलाफ वित्तीय सेवाओं, प्रेषण सुविधाओं सहित वस्तुओं और सेवाओं की खरीद की सुविधा प्रदान करते हैं।
NPCI की वेबसाइट के अनुसार जो लोग बैंकों से नहीं जुड़े हैं वह भी IMPS के माध्यम से PPIs के द्वारा पैसे भेज सकते हैं।
हालांकि, आईएमपीएस के माध्यम से स्थानांतरण के लिए शुल्क व्यक्तिगत सदस्य बैंकों और पीपीआई द्वारा तय किया जाता है।
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