रेगुलर सेविंग अकाउंट की तरह अब बेसिक सेविंग डिपॉजिट अकाउंट (BSBDA) में मिनिमम बैलेंस रखने की जरुरत नहीं होती है। सेविंग अकाउंट में मिनिमम बैलेंस ना रखने पर पेनाल्टी लगाई जा सकती है, जिसकी राशि हर बैंक अकाउंट में अलग-अलग है, लेकिन BSBDA के लिए ऐसा कोई प्रवधान नहीं है।
रिजर्व बैंक की तरह सभी बैंकों को आदेश है कि वे नया अकाउंट खुलवाने वाले हर व्यक्ति को इस सुविधा के बारे में बताएं। आप अपने रेगुलर सेविंग अकाउंट को बेहतर तरीके से मैनेज करने के लिए सेकंडरी अकाउंट खुलवा सकते हैं।
रेगुलर और जीरो बैलेंस अकाउंट में जमा राशि पर ब्याज दरों में कोई अंतर नहीं होता है। रेगुलर अकाउंट की तरह जमा, निकासी, एटीएम, चेक बुक और ऑनलाइन फंड ट्रांसफर जैसी सभी सुविधाएं मिलती हैं।
उम्र और आमदनी के आधार पर बैंक योग्यता की शर्तें रखते हैं, हालांकि आरबीआई गाइडलाइन्स के मुताबिक बैंकों को सलाह दी जाती है कि वे BSBDA अकाउंट के लिए उम्र और आमदनी जैसी शर्तें ना लगाएं।
रिजर्व बैंक ने निकासी या जमा पर कोई पाबंदी नहीं लगा रखी है, लेकिन बैंकों ने चार महीने में आधिकतम निकासी की सीमा तय कर रखी है। इसमें एटीएम, आरटीजीएस, एनईएफटी, ईएमआई और ब्रांच से कैश निकासी शामिल है। हालांकि यह बैंकों पर निर्भर नहीं है कि वे अतिरिक्त निकासी पर शुल्क लगाते हैं या नहीं। राशि जमा करने की कोई सीमा नहीं है।
मौजूदा सेविंग अकाउंट को आप BSBDA में नहीं बदल सकते हैं। आप नया अकाउंट खोल सकते हैं। एक व्यक्ति एक बैंक में केवल एक ही BSBDA अकाउंट खोल सकता है। यदि कोई रेगुलर सेविंग अकाउंट होल्डर है तो इसे BSBDA खोलने के 30 दिन के भीतर बंद करना होगा, नहीं तो बैंक इसे खुद ही 30 दिनों बाद बंद कर देगा।
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