हाल ही में भारत में जीएसटी को लागू किया गया है जो कि एक अप्रत्‍यक्ष कर है जो कई करों को एक साथ एक जगह पर भरने का मौका देता है। माना जा रहा है कि दीर्घकाल के लिए यह काफी लाभप्रद होगा लेकिन इन दिनों इसकी वजह से कई ग्राहक संशय में नज़र आ रहे हैं। उन्‍हें पता नहीं चलता है कि उनके बिल पर लगाया जाने वाला जीएसटी वैध है या नहीं। हालांकि रेस्‍तरां और होटल उद्योग में जीएसटी के नियमों को लेकर कोई अपवाद नहीं है।

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जीएसटी से पहले रेस्‍टोरेंट बिल पर टैक्‍स

1 जुलाई 2017 से पहले, रेस्‍टोरेंट बिल पर राज्‍य और केन्‍द्र स्‍तर पर अलग-अलग कर लगाये जाते थे जिसमें वैट, सर्विस टैक्‍स, स्‍वच्‍छ भारत सीज़, कृषि कल्‍याण सीज़ आदि के चार्ज भी लगाये जाते थे।

वैट 12.5% ​​और 14.5% के बीच में होता है जबकि सेवाकर 6% होता है। इसलिए, राज्य के आधार पर, कुल अप्रत्यक्ष कर 18.5% से 20.5% के बीच होता है।

 

जीएसटी के बाद फूड बिल पर कर

जीएसटी लागू होने के बाद बिल पर एसी और नॉन एसी पर अलग-अलग प्रकार का बिल लगाया जाता है। साथ ही आम आदमी को GST के बारे में समझाने के लिए SGST, UTGST के बराबर अनुपात में बांटा गया है।

एसी और नॉन-एसी रेस्‍तरां

जीएसटी के बाद एसी रेस्‍तरां में खाने पर बिल पर 18 प्रतिशत का जीएसटी लगेगा। वहीं यदि आप नॉन-एसी में खाते हैं तो आपको सिर्फ 12 प्रतिशत जीएसटी ही देना होगा।

समान अनुपात में सीजीएसटी और एसजीएसटी / यूटीजीएसटी

आम आदमी की समझ के लिए, जीएसटी को सीजीएसटी और एसजीएसटी / यूटीजीएसटी में बराबर अनुपात में बांटा गया है जो कि संदर्भित राज्‍य या केन्‍द्रशासित क्षेत्र में होता है और शेष भाग केन्‍द्र के लिए होता है।

शराब की खपत पर समान वैट

यदि शराब को खरीदा जाएं तो उस पर वैट लगेगा। यह जीएसटी के दायरे से बाहर रखी गई है जिसमें अलग चार्ज लगाये जाते हैं। इसके अलावा, दो करों में से कोई भी नहीं है, अर्थात जीएसटी और वैट एक दूसरे के लिए लागू किया जाना चाहिए।

सेवा चार्ज

सरकार की सलाह के अनुसार, यदि आप चाहते हैं तो आप सर्विस कर देने से इंकार कर सकते हैं जोकि अप्रत्‍यक्ष कर का हिस्‍सा नहीं होता है लेकिन ये होटल की अतिरिक्‍त आय का हिस्‍सा होता है जिसे वो आपसे आतिथ्य सेवाओं के लिए वसूलते हैं।